होर्मुज स्ट्रेट से निकले भारत के दो LPG जहाज, लेकिन क्या खत्म होगा गैस संकट? समझिए पूरा गणित
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है. इसका असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिख रहा है.
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है. इसका असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन...होर्मुज स्ट्रेट...पर भी दिख रहा है. और जब होर्मुज स्ट्रेट में हलचल होती है, तो उसकी गूंज सीधे भारत की रसोई तक सुनाई देती है....अब खबर आई है कि भारत अपने दो जहाज...शिवालिक और नंदादेवी को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने में सफल रहा है.... इन दोनों जहाजों पर एलपीजी गैस लदी हुई है. सवाल ये है कि क्या इन जहाजों से आ रही गैस भारत में एलपीजी के संकट को खत्म कर सकती है...? या ये सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है? आज इसी सवाल का जवाब समझेंगे विस्तार से.
दरअसल, भारतीय झंडे वाले इन दोनों जहाजों शिवालिक और नंदादेवी को ईरान ने 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की अनुमति दी थी. इसके बाद ये दोनों जहाज भारत की ओर रवाना हुए. इनमें से शिवालिक मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा है, जबकि नंदादेवी कांडला पोर्ट पर डॉक करने जा रहा है. मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट, शिपिंग एंड वाटरवेज के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक इन दोनों जहाजों पर कुल मिलाकर 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी गैस लदी हुई है.
अब जरा इसे अलग-अलग समझिए.
जहाज शिवालिक पर करीब 45 हजार मीट्रिक टन गैस है. जबकि जहाज नंदादेवी पर करीब 47,700 मीट्रिक टन LPG लदी हुई है. कागज पर ये आंकड़ा बड़ा लग सकता है. लेकिन जब इसे भारत की जरूरत के सामने रखकर देखते हैं, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है. भारत में इस समय करीब 33 करोड़ घरेलू LPG उपभोक्ता हैं. और देश में रोजाना एलपीजी की खपत 80 हजार टन से ज्यादा होती है.
अब अगर दोनों जहाजों की कुल गैस. यानी 92,700 टन को देश की रोजाना खपत से तुलना करें, तो ये गैस मुश्किल से एक दिन से थोड़ा ज्यादा ही चल सकती है. और दिलचस्प बात ये है कि होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर भारत पहुंचने में ही इन जहाजों को तीन से चार दिन लग जाते हैं. यानी जिस गैस को आने में चार दिन लगे, वो देश की जरूरतों के हिसाब से सिर्फ एक से डेढ़ दिन ही चल पाएगी.
यानी साफ है. इन दो जहाजों से एलपीजी संकट खत्म होने वाला नहीं है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट, शिपिंग एंड वाटरवेज के मुताबिक फारस की खाड़ी में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज फंसे हुए हैं. ये जहाज अभी तक होर्मुज स्ट्रेट से बाहर नहीं निकल पाए हैं.
अगर इन जहाजों को भी रास्ता मिल जाता है, तो भारत की ऊर्जा सप्लाई को बड़ी राहत मिल सकती है. इसी बीच एक और जहाज जग लाड़की भी होर्मुज स्ट्रेट से निकलकर भारत की ओर बढ़ रहा है. इस जहाज पर करीब 80,800 टन कच्चा तेल लदा हुआ है. यानी थोड़ी-थोड़ी राहत की खबरें जरूर आ रही हैं. और एक अच्छी खबर भारत के अंदर से भी है.
देश में एलपीजी प्रोडक्शन करीब 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है. पहले जहां भारत हर महीने करीब 1.158 मिलियन टन गैस का उत्पादन करता था, अब ये बढ़कर करीब 1.5 मिलियन टन प्रति माह हो गया है. इस बढ़े हुए प्रोडक्शन की वजह से भारत के पास इतना घरेलू उत्पादन है कि देश की जरूरतों को करीब 15 दिन तक संभाला जा सकता है. अब आगे क्या होगा, ये काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान आगे भी भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देता है या नहीं.
अगर इसी तरह जहाजों को रास्ता मिलता रहा, तो कुछ ही दिनों में भारत की गैस सप्लाई फिर से सामान्य हो सकती है. और अगर ऐसा हुआ, तो रसोई गैस को लेकर जो चिंता अभी दिखाई दे रही है, वो भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी.
shivendra 
