5 दिन से चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन का समापन, इंदौर ने दुनिया को दिया कृषि का नया रोडमैप

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक का समापन सर्वसम्मति से पारित ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रिक्स सम्मेलन का रोडमैप बताया

5 दिन से चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन का समापन, इंदौर ने दुनिया को दिया कृषि का नया रोडमैप

इंदौर। भारत की अध्यक्षता में 9 जून से आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक का समापन 13 जून शुक्रवार को सर्वसम्मति से पारित ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ। समापन के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों के लगभग 100 प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया और कई महत्वपूर्ण विषयों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए। इस दौरान तैयार किए गए घोषणा पत्र को इंदौर घोषणा पत्र के नाम से जाना जाएगा।

ब्रिक्स समूह की कृषि उत्पादन में 42 प्रतिशत हिस्सेदारी

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक कृषि उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में अनिश्चितता और तनाव का माहौल है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन अन्य देशों के लिए आशा, विश्वास और सहयोग का संदेश लेकर आया है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका, कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, टिकाऊ खेती, कृषि नवाचार और सदस्य देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई। विशेष रूप से रीजेनेरेटिव फार्मिंग और प्राकृतिक खेती को भविष्य की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना गया।

सर्वसम्मति से पारित ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ संयुक्त घोषणा

सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से एक संयुक्त घोषणा को अपनाया, जिसे "इंदौर डिक्लेरेशन" नाम दिया गया है। इसके तहत ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर ऑन एग्रो इकोलॉजी की स्थापना का निर्णय लिया गया है, जिसमें प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने में भारत की अहम भूमिका होगी।

इसके अलावा ब्रिक्स एग्रीकल्चर डिजिटल नेटवर्क की स्थापना का भी फैसला लिया गया है, जिसका समन्वय आईआईपी दिल्ली करेगा। यह मंच आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा। साथ ही ग्लोबल फोरम फॉर राइट सीड्स की स्थापना कर देशी और पारंपरिक बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन पर काम किया जाएगा।

प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ब्रिक्स एग्रीकल्चर रिसर्च प्लेटफॉर्म को और मजबूत करने तथा सदस्य देशों के बीच कृषि ज्ञान और तकनीक के आदान-प्रदान को गति देने पर भी सहमति बनी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंदौर डिक्लेरेशन ब्रिक्स देशों के कृषि सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा तथा किसानों के कल्याण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

ब्रिक्स सम्मेलन की यादों को हरियाली से जोड़ा गया

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान एक अनूठी पहल देखने को मिली। सम्मेलन को चिरस्थायी स्वरूप देने के उद्देश्य से मेघदूत उपवन में विशेष "ब्रिक्स वाटिका" का निर्माण किया गया, जहां विभिन्न देशों से आए कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

21 देशों के कृषि मंत्रियों ने लगाए फलदार पौधे

दरअसल ब्रिक्स सम्मेलन के तहत इंदौर के मेघदूत उपवन में विशेष रूप से विकसित की गई "ब्रिक्स वाटिका" में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सम्मेलन की स्मृतियों को पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास से जोड़ना रहा। इस दौरान ब्रिक्स समूह से जुड़े 21 देशों के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए और उन्होंने पौधारोपण कर इस पहल की सराहना की। इस कार्यक्रम में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, उद्यान प्रभारी पार्षद राजेंद्र राठौर सहित नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार ब्रिक्स वाटिका आने वाले वर्षों में सम्मेलन की यादों को संजोए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनेगी। वही इस