सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने

Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करने का आदेश दिया, जिससे ट्रिब्यूनल द्वारा मान्य वोटर्स को मतदान का अधिकार मिल सके। पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने, 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल मंजूरी वाले वोटर 23 अप्रैल को वोट डाल सकेंगे

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में नाम कटने वाले वोटर्स में से जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल ने फैसला सुना दिया है, उन्हें सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल किया जाए। सीजेआई सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि जिनकी अपीलें अभी पेंडिंग हैं, उन्हें विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पहले फेज (23 अप्रैल) के लिए 21 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल का फैसला आ जाना चाहिए। दूसरे फेज (29 अप्रैल) के लिए 27 अप्रैल तक फैसला होना जरूरी है। जैसे ही ट्रिब्यूनल नाम जोड़ने का आदेश देगा, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत वोटर लिस्ट में संशोधन करेगा।

90.83 लाख नाम कटे, 11.85% वोटर्स कम हुए..
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान कुल 90.83 लाख वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। अक्टूबर 2025 में राज्य में 7.66 करोड़ वोटर थे, अब यह संख्या घटकर करीब 6.76 करोड़ रह गई है। यानी कुल वोटर्स में 11.85% की कमी आई है। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। खासकर नॉर्थ 24 परगना में बड़े पैमाने पर डिलीशन हुआ है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह डुप्लिकेट और अयोग्य वोटर्स को हटाने की प्रक्रिया है, लेकिन विपक्ष इसे बड़े पैमाने पर वोटर सप्रेशन बता रहा है।


19 ट्रिब्यूनल पर 34 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित..
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 19 अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जिनकी अगुवाई रिटायर्ड हाईकोर्ट जज कर रहे हैं। इनके सामने अभी भी 34 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित हैं। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल पर अनावश्यक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए, लेकिन असली वोटर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत अपील प्रणाली जरूरी है। अगर बड़ी संख्या में सही वोटर्स बाहर रह जाते हैं और चुनाव में जीत का अंतर बहुत कम होता है, तो नतीजों की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।
कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को ट्रिब्यूनल को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया।

TMC का आरोप- चुनाव आयोग ने 5 मिनट में भगा दिया..
8 अप्रैल को TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में चुनाव आयोग से मिला था। बैठक के बाद डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि SIR मुद्दे पर चर्चा के लिए समय मांगा गया, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें सिर्फ 5 मिनट में भगा दिया।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि डेरेक ओ’ब्रायन ने CEC को बोलने नहीं दिया और धमकी भरे लहजे में बात की।


ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं, SIR पश्चिम बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा..
SIR विवाद अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और TMC ने इसे सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ साजिश बताया है। विशेष रूप से बांग्लादेश बॉर्डर वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर नाम कटने से TMC को 50 से ज्यादा सीटों पर अतिरिक्त चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ा रहा है कि वह 21 अप्रैल तक पहला फेज पूरा कर सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करे, ताकि योग्य वोटर्स को अपना अधिकार मिल सके।