RSS पर लगाया जाए बैन... USCIRF चीफ आसिफ महमूद की मांग, भागवत का 29 को न्यूयॉर्क दौरा
USCIRF ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है।
Ban RSS Demand : वांशिगटन डीसी। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF ने RSS को लेकर फिर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें राजनयिक सम्मान नहीं देने की सिफारिश की है। यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित विदेश दौरे से पहले आया है। आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं।


मोहन भागवत के दौरे से पहले आया बयान
USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने RSS को लेकर अमेरिकी सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील की है। आयोग ने RSS नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठकों और राजनयिक सम्मान से बचने की बात कही है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाने वाले हैं। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में वह ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं।
USCIRF ने RSS पर लगाए गंभीर आरोप
आयोग का कहना है कि RSS और उससे जुड़े संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ गतिविधियों के आरोप लगे हैं। USCIRF ने अमेरिकी सरकार से ऐसे लोगों और संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने को कहा है।
आयोग की 2026 की रिपोर्ट में RSS के साथ भारत की खुफिया एजेंसी R&AW का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में संपत्ति फ्रीज करने और अमेरिका में प्रवेश पर रोक जैसे कदमों की सिफारिश की गई है।
भारत पहले ही रिपोर्ट को खारिज कर चुका है
USCIRF की सिफारिशों पर भारत सरकार पहले ही आपत्ति जता चुकी है। विदेश मंत्रालय ने आयोग की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण और भारत की गलत तस्वीर पेश करने वाली बताया था।
भारत का कहना है कि USCIRF चुनिंदा घटनाओं के आधार पर देश को लेकर निष्कर्ष निकालता है। सरकार ने अमेरिकी धरती पर हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ जैसी घटनाओं पर भी ध्यान देने की बात कही थी।
भारत को CPC सूची में डालने की सिफारिश
USCIRF लंबे समय से भारत की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाता रहा है। 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भी आयोग ने भारत को ‘Country of Particular Concern’ यानी ‘विशेष चिंता वाला देश’ घोषित करने की सिफारिश की है।
आयोग ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई आरोपों का उल्लेख किया है। हालांकि, USCIRF की सिफारिश अपने आप में अमेरिकी सरकार का अंतिम फैसला नहीं होती।
100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत के दौरे का समर्थन किया
मोहन भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर वहां 100 से अधिक संगठनों के समर्थन की बात भी सामने आई है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत का दौरा रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले स्वतंत्र और ठोस सबूतों की जांच होनी चाहिए। साथ ही कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी बताया गया है।
USCIRF आखिर है क्या?
USCIRF यानी United States Commission on International Religious Freedom अमेरिका की एक स्वतंत्र संघीय सलाहकार संस्था है। इसे 1998 के International Religious Freedom Act के तहत बनाया गया था।
इसका मुख्य काम दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर निगरानी रखना है। आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करता है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देता है।
आयोग की सिफारिश से सीधे प्रतिबंध नहीं लगता
USCIRF किसी देश या संस्था के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार के पास रहता है इसलिए आयोग द्वारा RSS पर प्रतिबंध की मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि RSS पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसी तरह भारत को CPC घोषित करने की सिफारिश भी अपने आप अमेरिकी नीति या प्रतिबंध में नहीं बदलती।
आसिफ महमूद कौन हैं?
आसिफ महमूद USCIRF के वर्तमान चेयरमैन हैं। वह पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी चिकित्सक और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। USCIRF में उनकी भूमिका पहले उपाध्यक्ष के तौर पर रही और 2026 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया।
वह चिकित्सा के साथ मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। उनके हालिया बयान के बाद RSS और भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी आयोग की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है।
RSS और अमेरिका के बीच विवाद क्यों बढ़ा?
USCIRF की ताजा टिप्पणी और मोहन भागवत के आगामी विदेश दौरे के बीच मुद्दा ज्यादा चर्चा में आया है। एक तरफ आयोग RSS के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर रहा है।
दूसरी तरफ भारत इस तरह की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण बताता रहा है। ऐसे में भागवत का आगामी दौरा दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
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