India Economic Growth : PM मोदी की अपील- जरूरत न हो तो सोना न खरीदें, वैश्विक संकट में भारत की 7.8% ग्रोथ
India Economic Growth : PM मोदी ने कहा कि, भारत को विकास की यही रफ्तार आगे भी बनाए रखनी होगी। देश को तेज आर्थिक प्रगति के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा।
India Economic Growth : नई दिल्ली। भारत की आर्थिक विकास दर 7.8% रहने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। PM मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि देश की जनता की मेहनत, इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत को विकास की यही रफ्तार आगे भी बनाए रखनी होगी। देश को तेज आर्थिक प्रगति के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा।
7.8% growth.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2026
Strong numbers.
Even stronger confidence. pic.twitter.com/ZVPpnAXrVU
गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील
PM मोदी ने लोगों से जरूरत नहीं होने पर सोना खरीदने से बचने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि अगर सोने की जरूरत नहीं है, तो उसकी खरीदारी नहीं करनी चाहिए। इससे पहले 11 मई को भी उन्होंने देशवासियों से गैर-जरूरी सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। सरकार की इस अपील का संबंध देश के विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते सोने के आयात से है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 99% सोना विदेशों से खरीदता है।
झूठ और निराशा फैलाने वालों पर निशाना
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर कुछ लोग निराशा फैलाने और झूठ के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने 7.8% की आर्थिक विकास दर हासिल की है। उन्होंने कहा कि देश को इन चुनौतियों के बीच अपनी विकास की गति बनाए रखनी होगी।
PM मोदी ने लोगों से विदेश यात्रा और विदेश में शादी जैसे खर्चों को कम करने की भी अपील की। उन्होंने मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने और देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
आत्मनिर्भर भारत पर जोर
PM मोदी ने कहा कि भारत जितना अधिक स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देगा, देश उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की युवा पीढ़ी देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। इसके लिए आर्थिक विकास के साथ घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ाना जरूरी है।
सोने के आयात पर बढ़ा खर्च
भारत के लिए सोने का आयात विदेशी मुद्रा के लिहाज से अहम है। वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये का सोना आयात किया। विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्च में सोने की हिस्सेदारी करीब 9% रही।
मात्रा के लिहाज से भारत ने पिछले कारोबारी साल की तुलना में 4.76% कम सोना खरीदा। इसके बावजूद आयात बिल करीब 24% बढ़ गया। इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही।
बढ़ती कीमतों से आयात पर असर
सोने की कीमत में तेजी का सीधा असर भारत के आयात खर्च पर पड़ा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सोने का दाम करीब 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर 1 लाख डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गया।
फिलहाल कीमत करीब 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो बताई गई है। इतनी ऊंची कीमतों पर सोना खरीदने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से आयातक भी ऊंची कीमतों के बीच कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
भारत में सोने की खरीद में गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में भारत ने करीब 100 टन सोना खरीदा था। फरवरी में यह मात्रा घटकर करीब 65 टन रह गई। मार्च में करीब 22 टन सोने का आयात हुआ। अप्रैल में यह आंकड़ा करीब 15 टन रहने का अनुमान लगाया गया था।
यह पिछले करीब 30 वर्षों के सबसे निचले स्तरों में से एक बताया गया। सोने की घरेलू कीमतें भी 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंचने के कारण ग्राहकों की खरीदारी पर असर पड़ा है।
निवेश के लिए सोने की मांग मजबूत
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग ज्वेलरी की मांग से अधिक रही। महंगी कीमतों के बावजूद निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देख रहे हैं।
हालांकि ऊंची कीमतों के कारण आम ग्राहकों और आयातकों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में गैर-जरूरी खरीदारी कम करने की PM मोदी की अपील आर्थिक और विदेशी मुद्रा से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है।
कम आयात से विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा
अगर देश में गैर-जरूरी सोने की खरीद कम होती है, तो सोने के आयात की जरूरत भी घट सकती है। इससे भारत के आयात बिल पर दबाव कम होगा। साथ ही विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसका असर रुपये की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
PM मोदी की अपील का मुख्य उद्देश्य इसी तरह घरेलू खर्च, स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। सरकार चाहती है कि देश की आर्थिक विकास दर मजबूत बनी रहे और विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल जरूरी आयातों के लिए अधिक प्रभावी ढंग से हो।

