Nepal Flood Alert : नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा, नदियों का बढ़ा जलस्तर; मौत का आंकड़ा 1 हजार के पार
Nepal Flood Alert : नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।
Nepal Flood Alert : काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच एक बार फिर नया अलर्ट जारी किया गया है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने खासतौर पर रसुवा और नुवाकोट की छोटी नदियों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया है। अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम की स्थिति पर नजर रखने की अपील की है।
नेपाल में 987 लोगों की मौत, 3,916 लापता
26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी एक बड़ी घटना के बाद नेपाल में अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार 1 सितंबर तक देश में 987 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 3,916 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। वहीं नेपाल में 11,814 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और 279 लोग घायल हुए हैं।

चितवन में मिले सबसे ज्यादा 321 शव
बाढ़ के बाद अलग-अलग जिलों में शव मिलने का सिलसिला जारी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चितवन में सबसे ज्यादा 321 शव बरामद किए गए हैं। नवलपरासी ईस्ट में 216 और नवलपरासी वेस्ट में 170 शव मिले हैं। इसके अलावा नुवाकोट में 95, गोरखा में 65, धादिंग में 55, तनहूं में 38 और रसुवा में 27 शव बरामद किए गए हैं। बड़ी संख्या में शवों की पहचान अभी बाकी है।

मौतों का आंकड़ा 1,000 के पार
नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। चीन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार तिब्बत में अब तक 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता हैं। नेपाल में 987 मौतों को जोड़ने पर दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 1,003 हो गई है। दोनों जगह कुल 4,462 लोग अभी भी लापता बताए हैं। इस तरह यह आपदा हिमालयी क्षेत्र की सबसे गंभीर प्राकृतिक त्रासदियों में शामिल हो गई है।

सामूहिक कब्रों में दफनाए जा रहे अज्ञात शव
बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद नेपाल के कुछ प्रभावित इलाकों में पहचान की चुनौती बढ़ गई है। चितवन में शव रखने की जगह कम पड़ने और स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए अज्ञात शवों को सामूहिक रूप से दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
अधिकारियों की कोशिश है कि हर शव को अलग पहचान संख्या दी जाए। इससे भविष्य में डीएनए जांच या अन्य माध्यमों से पहचान होने पर परिजनों तक जानकारी पहुंचाई जा सकेगी। भारत की फॉरेंसिक टीम भी पीड़ितों की पहचान में मदद के लिए नेपाल पहुंची है।

11 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू
नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार बचाव अभियान चला रही हैं। अब तक 11,814 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। बाढ़ से सड़कें और पुल टूटने के कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है। ऐसे क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही बिजली और संचार व्यवस्था को भी धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश अभी भी जारी है।

चीन सीमा तक सड़क जोड़ने की कोशिश
तिब्बत में भी राहत और बचाव अभियान जारी है। बाढ़ और भूस्खलन से चीन-नेपाल सीमा के पास कई महत्वपूर्ण सड़कें और ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। बचाव दल प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए सड़क संपर्क बहाल करने में जुटे हैं।
लगातार बारिश, मलबे और नए भूस्खलन के खतरे के कारण अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में आगे भी मौसम और जलस्तर पर कड़ी नजर रखने को कहा है।

विदेश मंत्री ने बताया 'हिमालयन सुनामी'
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस आपदा को सामान्य बाढ़ से अलग बताया है। उन्होंने इसे 'हिमालयन सुनामी' जैसा बताया और कहा कि नेपाल जलवायु संकट का बड़ा खामियाजा भुगत रहा है। उनका कहना है कि नेपाल का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बहुत कम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं का असर देश पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। नेपाल ने जलवायु नुकसान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे की मांग का मुद्दा भी उठाया है।

ग्लेशियर घटना से शुरू हुई थी तबाही
26 अगस्त को हिमालय में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इससे नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया और कई इलाकों में तेज बाढ़ आ गई। इसके बाद भूस्खलन ने सड़क, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।
विशेषज्ञ इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिम से जोड़कर देख रहे हैं। राहत अभियान के साथ अब प्रभावित इलाकों में भविष्य के खतरे को कम करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।




