इंदौर: एक इंजेक्शन, 9 करोड़ की कीमत और तीन साल की अनिका की जिंदगी की जंग
जिसमें प्रवीण शर्मा और सरिता शर्मा की इकलौती संतान अनिका एक अति दुर्लभ बीमारी एसएलए टाइप-2 से पीड़ित है। इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन उसकी कीमत है पूरे 9 करोड़ रुपए है
इंदौर में तीन साल की मासूम अनिका शर्मा शायद यह नहीं जानती कि उसकी मुस्कान के पीछे उसके माता-पिता हर दिन एक ऐसी लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसमें समय, पैसा और उम्मीद तीनों एक साथ दौड़ रहे हैं। जिसमें प्रवीण शर्मा और सरिता शर्मा की इकलौती संतान अनिका एक अति दुर्लभ बीमारी एसएलए टाइप-2 से पीड़ित है। इस बीमारी का इलाज संभव है, लेकिन उसकी कीमत है पूरे 9 करोड़ रुपए। सिर्फ एक इंजेक्शन… और अनिका एक सामान्य, स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सकती है।
माता-पिता क्राउड फंडिंग के जरिए राशि जुटाने में लगे
दरअसल, बीते तीन से चार महीनों से अनिका के माता-पिता क्राउड फंडिंग के जरिए इस असंभव-सी लगने वाली राशि को जुटाने में लगे हैं। उन्होंने हर उस दरवाजे पर दस्तक दी, जहां से उम्मीद की एक किरण नेता, उद्योगपति, व्यापारी, समाजसेवी और नामी हस्तियों के रूप में दिखी है। वही गायक पलक मुच्छल, अभिनेता सोनू सूद जैसे लोग अनिका के लिए आवाज़ उठा चुके हैं। वही जब भारतीय क्रिकेट टीम जयपुर से इंदौर आई, तब अनिका की मां ने कप्तान रोहित शर्मा से भी अपनी बच्ची की जिंदगी के लिए गुहार लगाई। इन तमाम कोशिशों के बावजूद, और लाखों लोगों की मदद से, अब तक करीब साढ़े चार करोड़ रुपए ही जुट पाए हैं। यानी मंज़िल अभी आधी दूर है। लेकिन कहानी की सबसे पीड़ादायक सच्चाई यहां खत्म नहीं होती।

साढ़े 13 किलो वजन होने से पहले इंजेक्शन लगना अनिवार्य
वहीं, अनिका के इलाज की एक और शर्त है, उसका वजन। डॉक्टरों के अनुसार, साढ़े 13 किलो वजन होने से पहले ही उसे यह इंजेक्शन लगना अनिवार्य है। उम्र के साथ वजन बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन अनिका के माता-पिता के लिए यही प्राकृतिक प्रक्रिया एक डर बन चुकी है। वे हर दिन यही दुआ करते हैं कि उनकी बच्ची का वजन धीरे बढ़े, ताकि उन्हें थोड़ा और समय मिल सके। इसी डर के कारण अनिका को आज वह खाना नहीं मिल पा रहा, जो हर बच्चे को मिलना चाहिए। लेकिन अनिका को न रोटी, न चावल सिर्फ जूस, दूध और फल दिया जा रहा है, ताकि उसका वजन नियंत्रित रहे। आज अनिका का वजन करीब साढ़े 10 किलो है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि एक से डेढ़ महीने में वह साढ़े 13 किलो तक पहुंच सकती है।

समय तेज़ी से फिसल रहा है। अब आखिरी उम्मीद बनकर सामने आया है एक अनोखा अभियान “बच्ची को बचाएंगे बच्चे”, जो एक एनजीओ के साथ मिलकर अनिका के माता-पिता ने इंदौर के सभी स्कूलों से अपील की है कि अगर शहर के स्कूलों में पढ़ने वाले साढ़े चार लाख बच्चे सिर्फ 100-100 रुपए भी अनिका के लिए दान कर दें, तो बाकी बचे साढ़े चार करोड़ रुपए जुटाए जा सकते हैं। यह सिर्फ एक चंदा नहीं होगा, बल्कि बच्चों द्वारा एक बच्ची की जिंदगी बचाने का संकल्प होगा। आज अनिका की कहानी सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। यह समाज की संवेदनशीलता, हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और इंसानियत की परीक्षा है।
Varsha Shrivastava 
