मऊगंज में बिजली विभाग की 1912 हेल्पलाइन बनी सिर्फ दिखावा
मऊगंज में बिजली विभाग की 1912 हेल्पलाइन बनी सिर्फ दिखावा बिजली विभाग सरकार की मंशा पर फेर रहा पानी,उपभोक्ताओं ने विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
राजेंद्र पयासी मऊगंज: प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित कर किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली आपूर्ति की घोषणा की गई है, वहीं मऊगंज जिले में बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सरकार की मंशा के विपरीत कार्य कर रहे हैं। किसानों की शिकायतों का समय पर निराकरण न होने से शासन की किसान हितैषी छवि धूमिल हो रही है।
ताजा मामला ग्राम मटियरा का है। ग्राम निवासी किसान दीपेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2010 में कृषि हेतु दो फेस मोटर का विधिवत विद्युत कनेक्शन लिया है तथा नियमित रूप से विद्युत देयकों का भुगतान कर रहे हैं। उन पर विभाग का कोई बकाया नहीं है। किसान के अनुसार 3 सितंबर को उनके सर्विस लाइन का केबल खंभे से टूटकर अलग हो गया, जिससे मोटर पंप बंद हो गया और पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई।
समस्या का निदान नहीं, फिर भी निराकरण का संदेश
पीड़ित किसान ने बताया कि समस्या के निदान हेतु क्षेत्रीय लाइनमैन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु फोन रिसीव नहीं किया गया। इसके बाद किसान ने बिजली विभाग की हेल्पलाइन नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराई। गत 4 सितंबर को दर्ज शिकायत का क्रमांक 15993857 दिया गया। 11 सितंबर को विभाग द्वारा निराकरण का संदेश भेज दिया गया, जबकि मौके पर कोई कर्मचारी नहीं आया।
पुनः 11 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई गई, जिसका क्रमांक 16059586 है। पीड़ित किसान के अनुसार 20 सितंबर को फिर निराकरण का संदेश भेज दिया गया। तीसरी बार पुणे 20 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई गई, जिसका क्रमांक 16155329 है। शिकायत दर्ज कराए 24 दिन बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा आज तक केबल जोड़ने की कार्यवाही नहीं की गई है। इसी प्रकार किसान द्वारा 19.09.2026 को सीएम हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसका क्रमांक 4064477074 है, जिस पर भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
आंकड़ों में निराकरण, हेल्पलाइन की सार्थकता पर सवाल
पीड़ित किसान दीपेश कुमार द्विवेदी सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि 1912 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को एक सप्ताह के भीतर बिना मौके पर गए बंद कर दिया जाता है तथा नई शिकायत क्रमांक देकर आंकड़ों में निराकरण दर्शाया जाता है। इससे हेल्पलाइन की सार्थकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला प्रशासन से मांग है कि मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए एवं किसान की समस्या का तत्काल निराकरण कराया जाए।

