Mohan Bhagwat Ujjain Visit : धर्म उम्र का मोहताज नहीं... युवा धर्म संसद-2026 में बोले RSS के सरसंघचालक
Mohan Bhagwat Ujjain Visit : डॉ. मोहन भागवत ने आगे कहा कि, पश्चिमी सभ्यताओं ने पंथ/पूजा पद्धति को देखकर धर्म को ‘रिलिजन’ कहा, जबकि धर्म उससे ऊपर- पूरी सृष्टि को धारण करने वाला शाश्वत नियम और व्यवस्था है।
Mohan Bhagwat Ujjain Visit : मध्य प्रदेश। धर्म उम्र का मोहताज नहीं होता धर्म को केवल बुढ़ापे या अंतिम उम्र से जोड़ना गलत है। यह जीवन के प्रारंभ से अंत तक का परम सत्य है। इसे समझने के लिए पूर्वाग्रहों से बाहर निकलना होगा। यह बात RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद 2026 कार्यक्रम में संबोधन के दौरान कही है।
1600 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा
उज्जैन के गीता भवन में चल रही तीन दिवसीय ‘युवा धर्म संसद-2026’ के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवाओं से संवाद किया। सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भारत माता व स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। कार्यक्रम में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पहुंचे 1600 से अधिक युवा, विद्यार्थी और शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान डॉ. भागवत ने धर्म के व्यापक स्वरूप और जीवन में उसके महत्व पर विचार रखे।

प्रकृति से संतुलन सीखने की बात
युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने मधुमक्खी का उदाहरण देते हुए कहा कि मधुमक्खी फूल से रस लेती है, लेकिन उसे नुकसान नहीं पहुंचाती। इसी तरह मनुष्य को प्रकृति से लाभ लेते हुए उसके संतुलन का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की सफलता तभी सार्थक है, जब उससे समाज और अन्य लोगों का भी कल्याण हो।
यश से ज्यादा सार्थक जीवन जरूरी
डॉ. भागवत ने युवाओं से केवल धन और प्रसिद्धि की दौड़ में शामिल होने के बजाय संवेदना, करुणा और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बड़ी आर्थिक उपलब्धियों के बावजूद व्यक्ति अशांत रह सकता है। इसके विपरीत सेवा और धार्मिक मूल्यों के साथ बिताया गया जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने युवाओं को जीवन में सफलता के साथ सार्थकता पर भी ध्यान देने की बात कही।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होगा समापन
कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद महाराज, आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज, पद्म भूषण राम बहादुर राय, आचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, मनोज मुंतशिर शुक्ला, प्रो. हिमांशु राय, मातृश्री स्मृति अनंत लक्ष्मी, डॉ. इंदुमती काटदरे और डॉ. आनंद रंगनाथन सहित कई अतिथि मौजूद रहे। तीन दिवसीय आयोजन का समापन 19 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष उपस्थिति में होगा।

