मऊगंज: ठेकेदार की मनमानी से अधर में लटका तालाब और मंदिर का कायाकल्प
प्रशासनिक अनदेखी: अधर में लटका ऐतिहासिक सिगदार तालाब के सौंदर्यीकरण का निर्माण कार्य, 29.63 लाख मंजूर पर हनुमान मंदिर परिसर में काम शुरू होकर ठप
मऊगंज से राजेंद्र पयासी की रिपोर्ट।
जिले के नगर परिषद नईगढ़ी द्वारा अमृत 2.0 योजना के तहत 29.63 लाख रुपये की लागत से कराया जाने वाला सिगदार तालाब समतलीकरण और श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर का कायाकल्प कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। भूमि पूजन के बाद ठेकेदार द्वारा थोड़ा-बहुत काम कर एक बंद किए जाने के बाद दोबारा काम शुरू नहीं हो सका। नगर प्रशासन की उदासीनता और ठेकेदार की मनमानी के चलते ऐतिहासिक धार्मिक स्थल का विकास सपना ही रह गया है।
नईगढ़ी कस्बे के महावीरपुर बसाहट स्थित सिगदार तालाब के उत्तरी भाग में विराजे श्री सिद्ध हनुमान मंदिर नईगढ़ी का गौरवशाली इतिहास रहा है। राजवंश कार्यकाल से ही यह स्थल पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। यहां विराजमान भगवान वीर बजरंगबली के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। आज भी मंगलवार और शनिवार को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहीं प्रतिदिन भी लोगों का तांता लगा रहता है। लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण यह ऐतिहासिक धर्मस्थल आज तक विकास से वंचित है।

कई बार विकास कार्य के नाम पर राशि मंजूर
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी कई बार विकास कार्य के नाम पर राशि मंजूर की गई, लेकिन परिसर क्षेत्र का विकास धरातल पर नजर नहीं आया। क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के अथक प्रयासों से श्री सिद्ध हनुमान मंदिर और सिगदार तालाब महावीरपुर के कायाकल्प के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 29.63 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी। इस राशि से मंदिर परिसर सहित तालाब क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कार्य कराया जाना था।
निर्धारित कार्य योजना के तहत खाइयों में तब्दील तालाब का समतलीकरण किया जाना था। पूरे क्षेत्र को हरा-भरा और आकर्षक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना थी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के बैठने, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भंडारा आदि के लिए पूरा परिसर बेहतर ढंग से तैयार किया जाना था। मंदिर परिसर के साथ-साथ तालाब के टापू परिसर में पेवर ब्लॉक लगाए जाने थे। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उत्तम व्यवस्था और छाया के लिए व्यवस्थित ढंग से टीन शेड लगाए जाने की कार्य योजना शामिल थी।
जिम्मेदारों ने योजना पर लगाया पलीता
जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण बहु-प्रतीक्षित सौंदर्यीकरण का कार्य आज तक पूर्ण नहीं हो सका। निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिए जाने से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी और बारिश में छाया और बैठने की व्यवस्था न होने से बुजुर्ग और महिला श्रद्धालुओं को विशेष दिक्कत होती है। पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने से भी लोग परेशान हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक हनुमान मंदिर महावीरपुर और मंदिर परिसर स्थित सिगदार तालाब परिसर का सौंदर्यीकरण हो जाने से यह क्षेत्र सामान्य पर्यटक क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकता था। इससे जहां क्षेत्र के नागरिकों को घूमने के लिए एक बेहतर स्थान मिलता, वहीं श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा मिलने के आसार थे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ते।
भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ी योजना
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदारी प्रथा इस कदर हावी है कि 29.63 लाख की योजना भी भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई। काम शुरू कर बीच में बंद कर देने से सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है। लोगों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि अधूरे कार्य को तुरंत शुरू कराया जाए और दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, सिगदार तालाब की खाइयां जस की तस हैं। न पेवर ब्लॉक लगे, न टीन शेड और न ही पौधारोपण हुआ। श्रद्धालु आज भी अव्यवस्थाओं के बीच दर्शन करने को मजबूर हैं। ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार की उम्मीद लगाए क्षेत्रवासियों को अब प्रशासन से ठोस कार्यवाही का इंतजार है।
Varsha Shrivastava 
