RBI ने बढ़ाया रेपो रेट: 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया, अब कर्ज लेना और चुकाना भी महंगा

फेस्टिव सीजन से पहले महंगा हुआ कर्ज: RBI ने ब्याज दर 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया, GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% किया: महंगाई की चिंता बढ़ी, EMI कटेगी ज्यादा, RBI की चेतावनी- आगे कीमतें और बढ़ेंगी

RBI ने बढ़ाया रेपो रेट: 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया, अब कर्ज लेना और चुकाना भी महंगा

महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच Reserve Bank of India (RBI) ने बड़ा फैसला लिया है। RBI ने रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। करीब 4  साल बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश में फेस्टिव सीजन शुरू हो चुका है और खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। ब्याज दर बढ़ने से होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की EMI पर असर पड़ सकता है।

RBI की Monetary Policy Committee (MPC) की 3 दिन चली बैठक के बाद गवर्नर Sanjay Malhotra ने 7 अक्टूबर को नई ब्याज दरों का ऐलान किया। RBI ने महंगाई को लेकर भी चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।

रेपो रेट बढ़ने से क्या होगा?

रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। जब RBI इस दर को बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है। इसका असर आगे ग्राहकों को मिलने वाले लोन पर पड़ सकता है।

ऐसे में बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इससे नई EMI महंगी हो सकती है और पहले से चल रहे फ्लोटिंग रेट वाले लोन की EMI या ब्याज का बोझ भी बढ़ सकता है। RBI का मकसद ब्याज दर बढ़ाकर बाजार में खर्च और कर्ज की मांग को नियंत्रित करना है। इससे मांग पर दबाव कम होगा और महंगाई को काबू करने में मदद मिल सकती है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम

RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। आने वाली बैठकों में RBI दरों को मौजूदा स्तर पर रख सकता है या जरूरत पड़ने पर इनमें और बढ़ोतरी कर सकता है।

पहले 0.25% की बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक थी, लेकिन नीति के रुख में बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि RBI की प्राथमिकता फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करना है। वहीं, अनुमान ये भी है कि आगे ब्याज दरों में 0.25% से 0.50% तक और बढ़ोतरी हो सकती है। BI महंगाई के खतरे को समय रहते नियंत्रित करना चाहता है।

2026-27 में महंगाई 5.2% रहने का अनुमान

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। दूसरी तिमाही यानी Q2 FY27 में महंगाई 4.9%, तीसरी तिमाही में 6.0% और चौथी तिमाही में 5.7% रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 5.6% रह सकती है। महंगाई बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की खरीदारी क्षमता पर पड़ सकता है। खासकर फेस्टिव सीजन में अगर लोन महंगे होते हैं तो बड़े सामान की खरीदारी पर असर देखने को मिल सकता है।

2026-2027 में GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान

महंगाई की चिंता के बीच RBI ने आर्थिक विकास को लेकर अच्छी खबर भी दी है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। RBI को दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2%, तीसरी तिमाही में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने की उम्मीद है। यानी महंगाई का दबाव बढ़ने के बावजूद RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद है।