मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर MP HC सख्त, 60 दिन में जांच के आदेश

मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतिमा बागरी की बढ़ेगी मुश्किलें। जाति प्रमाण पत्र मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने 60 दिनों के अंदर मामले की जांच पूरी करने के निर्देश दिए।

मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र पर MP HC सख्त, 60 दिन में जांच के आदेश

मध्यप्रदेश सरकार में नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 60 दिनों के अंदर जांच पूरी के निर्देश दिए हैं। अदालत ने हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को प्रमाण पत्र की वैधता पर निर्णय लेने के लिए दो महीने का समय दिया है। इसी तय समयसीमा में प्रमाण पत्र की वैधता पर फैसला होगा और फिर छानबीन समिति कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी।

प्रदीप अहिरवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी जानकारी 

भोपाल में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। यह विवाद सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से जुड़ा है, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि प्रतिमा बागरी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि बागरी अनुसूचित जाति से नहीं, बल्कि राजपूत/ठाकुर समुदाय से संबंध रखती हैं और गलत तरीके से SC आरक्षण का लाभ उठा रही हैं। 

बता दें, प्रदीप अहिरवार ने अपनी याचिका में कई दस्तावेजों का हवाला दिया है। उन्होंने 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, 2003 में राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्णय और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का उल्लेख करते हुए कहा है कि ‘बागरी’ जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इन तथ्यों के आधार पर प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठता है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 60 दिन में मांगी रिपोर्ट

फिलहाल, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीधे जांच करने के बजाय मामले को हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को भेज दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कमेटी निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों को सुनकर 60 दिनों के अंदर फैसला ले। अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिवादी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 30 अप्रैल 2026 तक कोर्ट के आदेश की प्रति कमेटी को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजें। इसके बाद कमेटी संबंधित पक्षों को बुलाकर जांच प्रक्रिया पूरी करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 तक कमेटी को अपना निर्णय देना होगा। यदि तय समय में फैसला नहीं आता है, तो याचिकाकर्ता को फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता होगी।

बता दें इस मुद्दे को पहले भी उठाया गया था और याचिका दायर की गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया था। अब नए दस्तावेजों और तथ्यों के साथ यह मामला फिर से अदालत में लाया गया है, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जिम्मेदारी हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी पर है। कमेटी जांच के दौरानके बाद यह तय किया जाएगा कि प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र वैध है या नहीं।