पदोन्नति में बाधा नहीं बनेगी CPCT परीक्षा, CM डॉ. मोहन यादव ने दिए सकारात्मक निर्णय के निर्देश

MP के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राहत, CPCT के कारण न प्रमोशन रुकेगा न रिवर्ट होंगे कर्मचारी

पदोन्नति में बाधा नहीं बनेगी CPCT परीक्षा, CM डॉ. मोहन यादव ने दिए सकारात्मक निर्णय के निर्देश

Bhopal। मध्यप्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति को लेकर राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि CPCT परीक्षा पास करने की अनिवार्यता को लेकर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने साफ कहा है कि CPCT परीक्षा के कारण किसी भी तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, जिन कर्मचारियों को पदोन्नति मिल चुकी है, उन्हें केवल CPCT की शर्त पूरी नहीं होने के कारण रिवर्ट करने की स्थिति भी नहीं बननी चाहिए।

15 हजार कर्मचारियों को राहत

CPCT की अनिवार्यता से प्रदेश के करीब 15 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित होने की बात सामने आई थी। General Administration Department (GAD) ने 22 जुलाई को जारी आदेश में CPCT परीक्षा पास करने की शर्त को पदोन्नति से जोड़ दिया था। इसके तहत जिन कर्मचारियों के पास CPCT प्रमाण-पत्र नहीं था, उन्हें पदोन्नति के लिए पात्र नहीं माना जाना था।

इसके बाद GAD ने जुलाई में की गई पदोन्नति की कार्रवाई को रद्द कर दिया था। पदोन्नत किए गए कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रिवर्ट भी किया गया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई और कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाया।

कर्मचारी संगठनों ने किया था विरोध

CPCT की अनिवार्यता के विरोध में Madhya Pradesh State Employees Union, Third Class Employees Union और Clerical Employees Union सहित कई कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन किया। संगठनों ने मांग की थी कि 22 जुलाई को जारी GAD के आदेश को वापस लिया जाए। पिछले दिनों कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने Vindhyachal Bhawan के सामने प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने GAD के आदेश की प्रतिकात्मक होली भी जलाई और आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

अनुकंपा नियुक्ति में भी बनी परेशानी

CPCT की अनिवार्यता का असर केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं है। अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में भी CPCT की शर्त को लेकर कर्मचारियों और उनके परिवारों में परेशानी सामने आई है। सरकारी कर्मचारी की असमय मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है। लेकिन, CPCT की अनिवार्यता के कारण कई मामलों में नियुक्ति पाने वाले युवाओं के सामने नौकरी पर संकट खड़ा हो गया। इस मुद्दे को लेकर नौकरी गंवाने वाले कुछ युवाओं ने मंत्रालय के सामने प्रदर्शन भी किया था।

मुख्यमंत्री के ताजा निर्देशों के बाद अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि CPCT की अनिवार्यता को लेकर जल्द स्पष्ट और राहत देने वाला फैसला होगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी केवल CPCT परीक्षा के कारण पदोन्नति के लाभ से वंचित न रहें।