MP के बांधों में मछली उत्पादन घोटाला, नियमों को ताक पर रख किया जा रहा करोड़ों का खेल
दुर्लभ सुखन मछली पर संकट: बांधों में अवैध शिकार और मत्स्य विभाग पर मिलीभगत के आरोप
मध्य प्रदेश के विभिन्न बांधों में मछली उत्पादन के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मत्स्य विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से शासन के नियमों को दरकिनार कर करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार किया जा रहा है।
मामले में क्षेत्रीय प्रबंधक निलेश साहू पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जबकि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि मध्य प्रदेश मत्स्य निगम के सीजीएम रवि गजभैया और एमडी अनुराग चौधरी सारे हालातो से वाकिफ है, लेकिन अनदेखी कर रहे हैं।
बांधों में मछली उत्पादन में भारी भ्रष्टाचार
जानकारी के अनुसार बल्देवगढ़ स्थित सुजारा डैम, कटनी के तेंदू घाट डैम और राजनगर के कुटने डैम में मछली उत्पादन के लिए डाले जाने वाले मत्स्य बीज में भारी गड़बड़ी की जा रही है। शासन के नियमों के अनुसार बांधों में कतला और रोहू प्रजाति का 40 प्रतिशत और नरेला या मृगल प्रजाति का 20 प्रतिशत बीज डाला जाना चाहिए। साथ ही बीज का आकार 70 मिलीमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। आरोप है कि ठेकेदार मनमाने तरीके से बीज डालकर उत्पादन बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने में लगे हैं।
मामले का सबसे गंभीर पक्ष दुर्लभ “सुखन” मछली के अवैध शिकार को लेकर सामने आया है। शासन द्वारा इस प्रजाति के संरक्षण के लिए शिकार पर रोक लगाए जाने के बावजूद बड़े पैमाने पर सुखन मछली को बांधों से निकालकर महानगरों में बेचा जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो प्रदेश की जल जैव विविधता और मत्स्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय लोगों ने सरकार से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
Varsha Shrivastava 
