रीवा में नल जल योजना का लोगों को नहीं मिल रहा पानी

प्रदेश में जल जीवन मिशन की हालत गंभीर होती जा रही है। 50% से अधिक पानी की टंकियां सूखी पड़ी हैं और कई निर्माण कार्य सालों से अधूरे हैं। बावजूद इसके विभाग ने अब ग्रामवासियों से अंशदान वसूलने का फरमान जारी कर दिया है।

रीवा में नल जल योजना का लोगों को नहीं मिल रहा पानी

सूबे में जल जीवन मिशन की स्थिति अत्यंत खराब है वर्तमान हालात देखे जाए तो 50 फ़ीसदी से अधिक पानी की टंकियां सूखी पड़ी हुई है। वहीं अधिकतर पानी की टंकियों का निर्माण कार्य कई वर्षों से आधा अधूरा पड़ा हुआ है लेकिन विडंबना कहे या विभाग तथा ठेकेदारों के बीच चल रही जुगलबंदी के कारण शासन की यह अति जनकल्याणकारी योजना का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है।

नल जल योजना के तहत आमजन मानस को पानी तो नसीब नहीं हो रहा है उधर जल जीवन मिशन द्वारा एक बड़ा फरमान जारी कर दिया गया। स्थिति यह है कि जल जीवन मिशन से ग्रामीण क्षेत्र की जनता को पानी मिले या न मिले।

किन्तु अभिलेखों में जिन ग्रामों की योजनाओं का पूर्ण बता दिया गया है और वे कागजों में चालू बताई जा रही है वहां के परिवारों से अब अंशदान की राशि वसूल की जायेगी। इस संबंध में दिशा निर्देश भी जारी कर दिये गये हैं।

जारी आदेश के अनुसार ग्राम पाईपलाईन जलापूर्ति संरचना एवं संबंधित श्रोत विकास हेतु 50 प्रतिशत, अनुसूचित जाति एवं जनजाति वाले ग्रामो में समुदाय के लिये 5 प्रतिशत एवं अन्य ग्रामो से 10 प्रतिशत की राशि अंशदान के रूप में जमा करवाई जायेगी।

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निर्धारित किश्तों में ली जायेगी

कहा गया है कि जन सहयोग राशि जल स्वच्छता समिति द्वारा निर्धारित किश्तों में ली जायेगी। पेयजल योजना की कुल लागत की 5 एवं 10 प्रतिशत राशि ली जायेगी। अति गरीब परिवारों से सहयोग राशि नहीं ली जायेगी। जन सहयोग श्रमदान, नकद या सामग्री के रूप में भी ली ला सकती है।

उपभोक्ता जन सहयोग राशि को डिजिटल माध्यम से भी जमा कर सकेगा । भुगतान तुरंत बाद से उसे डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी। इसलिये अब देखना होगा के पूर्ण अपूर्ण योजनाओं का हाल मऊगंज एवं रीवा जिले में जल जीवन मिशन की योजनाओं का हाल अभी तक स्पष्ट नहीं है।

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बसाहटों में नहीं पहुंच पा रहा पानी -

 जल जीवन मिशन की जमीनी स्थिति देखी जाए तो कागजी आंकड़ों में जिन योजनाओ को पूर्ण एवं चालू बताया जाता है उन्हीं योजनाओं को लेकर कई तरह के सवाल उठते हैं ।

कही बताया जाता है कि नलों के माध्यम से घरों तक पानी ही नहीं पहुच रहा है तो कहीं पानी की टंकियां ही बनते ही लीकेज हो गई। कहीं बताया जाता है कि कुछ परिवारों तक ही पानी पहुचता है। जितनी मात्रा में पानी पहुचना चाहिये उतनी मात्रा में पानी भी नहीं पहुच रहा है। योजनाओ का ट्रायल भी कई जगह नहीं हो पाया है।

बावजूद इसके पंचायतों पर हैण्डओवर करने का दबाब बनाया जा रहा है। इसलिये कहा जा सकता है कि जब योजना की पूर्णता को लेकर ही कई तरह के सवाल उठ रहे हैं तो फिर उसके नाम पर अंशदान कोई परिवार कैसे दे सकता है। जब तक वह संतुष्ट नहीं होता और उसे यह विश्वास नही हो जाता कि योजना सही तरीके से संचालित हो रही है।

उसे पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा है। इसलिये अब देखना होगा कि अंशदान जमा करने की प्रगति क्या होती है।