जग्गी हत्याकांड: SC से राहत मिलने के बाद अमित जोगी बोले- मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को राहत दे दी है। साथ ही अदालत ने CBI से जवाब मांगा है।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ उनकी गिरफ्तारी और सरेंडर पर फिलहाल रोक लगा दी है, बल्कि मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से विस्तृत जवाब भी तलब किया है। इस फैसले से फिलहाल अमित जोगी को राहत मिल गई है और मामले की सुनवाई अब शीर्ष अदालत में आगे जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा- उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उनकी कानूनी टीम ने जिस तरह से मामले को आगे बढ़ाया है, उसके लिए वे आभारी हैं।

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए दो महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। पहला, अमित जोगी को हाईकोर्ट के आदेश के तहत किए जाने वाले सरेंडर पर रोक लगा दी गई है। दूसरा, कोर्ट ने CBI से इस पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग आदेशों को चुनौती दी थी। पहला, जिसमें CBI को अपील करने की अनुमति दी गई थी और दूसरा, हाईकोर्ट का वह निर्णय जिसमें उन्हें हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
हाईकोर्ट का फैसला और सजा का आदेश
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को एक अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को IPC की धारा 302 (हत्या) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया था। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामले ने फिर से राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल पैदा कर दी थी। इसी आदेश के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

जानें 2003 के जग्गी हत्याकांड के बारे में
रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को गोली मारकर की गई थी। वे उस समय एनसीपी (NCP) से जुड़े एक प्रमुख नेता थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। इस हत्याकांड ने पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला कर रख दिया था।

इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच और सुनवाई के दौरान दो आरोपियों ने सरकारी गवाह बनने का निर्णय लिया, जबकि बाकी कई लोगों को दोषी ठहराया गया। अमित जोगी को छोड़कर अन्य आरोपियों को विभिन्न सजा सुनाई गई थी।
ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों में बदलाव
वर्ष 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। लेकिन मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत माना गया।

हाईकोर्ट ने कहा था कि यह मानना कि इतनी बड़ी साजिश अमित जोगी की जानकारी के बिना हुई, न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य आरोपियों की भूमिका इस ओर इशारा करती है कि इसमें साजिश की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
CBI जांच और आरोपों का विवाद
मृतक पक्ष का आरोप है कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी और उस समय की राज्य सरकार के प्रभाव में सबूतों को प्रभावित किया गया था। उनके वकील का तर्क था कि इस तरह के मामलों में केवल प्रत्यक्ष सबूत ही नहीं, बल्कि साजिश की पूरी श्रृंखला को समझना भी जरूरी होता है। दूसरी ओर बचाव पक्ष का कहना है कि अमित जोगी को गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है और ट्रायल कोर्ट का मूल निर्णय सही था, जिसमें उन्हें बरी किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अब दोनों मामलों को एक साथ जोड़कर सुनवाई करने का आदेश दिया है। यानी अब हाईकोर्ट के दोषसिद्धि आदेश और CBI से जुड़ी अपील संबंधी मुद्दे पर एक साथ विचार किया जाएगा अगली सुनवाई में CBI को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। उसके बाद अदालत यह तय करेगी कि हाईकोर्ट का फैसला कायम रहेगा या नहीं।
Varsha Shrivastava 
