बालाघाट में 2.79 करोड़ का धान घोटाला: EOW ने मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों समेत 8 पर दर्ज की FIR
शासकीय धान की कस्टम मिलिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की अनियमितता और हेराफेरी के मामले में (EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
बालाघाट। शासकीय धान की कस्टम मिलिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की अनियमितता और हेराफेरी के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। यह मामला वर्ष 2023-24 के दौरान हुए कथित धान घोटाले से जुड़ा है, जिसमें शासन को लगभग 2.79 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है।
प्रकरण में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) बालाघाट और म.प्र. स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड (नान) के तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों के साथ-साथ सचदेव राइस मिल, कोसमी के संचालकों को आरोपी बनाया गया है।
शिकायत से खुला मामला
मिली जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 32, प्रभुत्तम नगर, बालाघाट निवासी शिकायतकर्ता द्वारा EOW में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि मार्कफेड एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने राइस मिल संचालकों के साथ मिलीभगत कर शासकीय धान की कस्टम मिलिंग में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की है। शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच की गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
महाराष्ट्र बॉर्डर पर पकड़े गए ट्रक
जांच के दौरान 2 अप्रैल 2024 को सचदेव राइस मिल, कोसमी से कथित रूप से शासकीय धान महाराष्ट्र ले जाते समय दो ट्रकों को अंतरराज्यीय इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, रजेगांव (महाराष्ट्र सीमा) पर रोका गया। ट्रकों के क्रमांक MH04 FJ6528 और CG04 JD4982 बताए गए हैं। इनमें से एक ट्रक ओवरलोड पाया गया, जिस पर 12 हजार रुपये का चालान किया गया।
सूचना मिलने पर मार्कफेड के तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त) द्वारा मौके पर जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर मिल संचालकों ने दावा किया कि ट्रक कोसमी स्थित मिल की ओर जा रहे थे, किंतु चालक की गलती से महाराष्ट्र सीमा तक पहुंच गए। हालांकि दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि संबंधित ट्रकों का परसवाड़ा कैप से धान लोड किया जाना दर्ज नहीं था, जिससे संदेह और गहरा गया।
क्षमता से अधिक अनुबंध
जांच में यह भी सामने आया कि सचदेव राइस मिल की वास्तविक स्थापित क्षमता 4 मीट्रिक टन प्रति घंटा थी, जबकि अनुबंध में 6 मीट्रिक टन प्रति घंटा दर्शाई गई। आरोप है कि जिला विपणन अधिकारी द्वारा बिना भौतिक सत्यापन और निरीक्षण के ही अधिक क्षमता के आधार पर अनुबंध स्वीकृत किया गया।
इतना ही नहीं, जुलाई 2024 में पदस्थ वर्तमान जिला विपणन अधिकारी द्वारा भी इसी प्रकार मिल की क्षमता अधिक दर्शाते हुए 36 लॉट धान का अनुबंध किया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि अधिक क्षमता दर्शाने से मिल को ज्यादा धान आवंटित किया गया, जिससे हेराफेरी की संभावना बढ़ी।
बिजली खपत में भी गड़बड़ी
प्रकरण की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। धान से चावल बनाने की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जितनी बिजली खपत होनी चाहिए थी, उसके मुकाबले लगभग आधी बिजली खपत दर्शाई गई। इसके बावजूद भुगतान नियमित रूप से किया गया। इससे यह आशंका व्यक्त की गई कि शासकीय धान का कुछ हिस्सा मिलिंग में उपयोग न कर अवैध रूप से अन्य राज्यों—विशेषकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़—भेजा गया।
बिना सत्यापन किए हुआ भुगतान
जांच में यह भी पाया गया कि ट्रक पर्ची, गेट पास, तौल पर्ची, फास्ट टैग, टोल टैक्स रसीद, आर.आर., बोरी संख्या और वजन जैसे आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना ही भुगतान स्वीकृत किया गया। नागरिक आपूर्ति निगम के तत्कालीन जिला प्रबंधक और लेखापाल द्वारा मात्र स्वीकृति पत्रक के आधार पर भुगतान किया गया।
आरोप है कि देयकों में निर्धारित कटौती, कर और पेनाल्टी की वसूली भी नहीं की गई। संबंधित अधिकारियों ने सभी आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण किए बिना ही भुगतान की अनुशंसा की, जिससे शासन को सीधी आर्थिक हानि हुई।
एक ही बिजली कनेक्शन से दो मिल
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि मिल मालिक द्वारा 100 रुपये के स्टांप पर किरायानामा बनाकर अपने ही परिजन को मिल किराए पर देने का अनुबंध किया गया था। आरोप है कि एक ही बिजली कनेक्शन से दो राइस मिल संचालित की जा रही थीं, जो मिलिंग नीति के प्रावधानों के विपरीत है।
2.79 करोड़ का भुगतान
पूरी जांच के बाद EOW ने पाया कि वर्ष 2023-24 के दौरान कस्टम मिलिंग प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए लगभग 2.79 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह भुगतान प्रक्रियात्मक त्रुटियों, दस्तावेजी अनियमितताओं और कथित आपराधिक षड्यंत्र के माध्यम से किया गया, जिससे शासन को आर्थिक क्षति हुई।
8 आरोपियों पर मामला दर्ज
मामले में मार्कफेड के तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त), तत्कालीन और वर्तमान जिला विपणन अधिकारी, उप प्रबंधक (वित्त), नागरिक आपूर्ति निगम के तत्कालीन जिला प्रबंधक, लेखापाल तथा सचदेव राइस मिल के प्रोप्राइटर और संचालक सहित कुल 8 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है।
EOW ने प्रकरण को विवेचना में ले लिया है और दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
Varsha Shrivastava 
