सपा प्रदेशाध्यक्ष बोले-छतरपुर में 30 हजार करोड़ का ग्रेनाइट घोटाला, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
छतरपुर के ग्रेनाइट खनन मामले में 30 हजार करोड़ के घोटाले की जांच में हाईकोर्ट ने सरकार और खनिज विभाग से जवाब और रिकॉर्ड मांगा है.
छतरपुर के ग्रेनाइट मामले में उठे घोटाले, राजस्व हेराफेरी और अवैध खनन के आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सरकार, खनिज विभाग और संबंधित अधिकारियों से जवाब और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
30 हजार करोड़ का घोटाला और अवैध ग्रेनाइट खनन
रिपोर्टों के अनुसार, छतरपुर जिले के ग्राम मड़वा और सिलपतपुरा क्षेत्र में 1997 से लगातार ग्रेनाइट खनन चल रहा है, जिसमें राजस्व हेराफेरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि 28 साल में लगभग 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक की संभावित राजस्व हानि हुई है, जिसमें रॉयल्टी, लोकल डेवलपमेंट फीस और अन्य शुल्कों की वसूली के आरोप शामिल हैं। इस मामले में जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट की शर्तों के उल्लंघन का भी आरोप है। 1997 में मध्य प्रदेश स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन और किसान मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें कंपनी से 200% लोकल डेवलपमेंट फीस देने, बैंक गारंटी जमा करने और प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की शर्तें थीं। लेकिन याचिका के मुताबिक कंपनी ने इनमें से कोई शर्त पूरी नहीं की, फिर भी खनन गतिविधियां जारी रहीं।

उच्च न्यायालय ने क्या कहा?
जबलपुर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए मामले को “अत्यंत गंभीर” माना है और राज्य सरकार, खनिज विभाग सचिव, मध्य प्रदेश स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक, कलेक्टर छतरपुर सहित अन्य अधिकारियों से विस्तृत रिकॉर्ड और तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर प्रारंभिक तथ्यों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो स्वतंत्र जांच, CBI या किसी उच्चस्तरीय एजेंसी की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका क्रमांक 41873/2025 को ग्राम पंचायत भैरा (छतरपुर) के सरपंच शिवराम दीक्षित और पत्रकार दिलीप सिंह भदौरिया द्वारा दायर किए जाने की पुष्टि की है, जिसमें खनन करने वाली कंपनी किसान मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक विनोद खेड़िया के खिलाफ अवैध खनन, राजस्व हानि और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अभी तक कोर्ट ने अंतिम फैसला नहीं दिया है और मामले की सुनवाई जारी है।
रॉयल्टी और राजस्व हानि के आरोप
याचिका में यह दावा किया गया है कि 2005 में गजट नोटिफिकेशन के बाद ग्रेनाइट की रॉयल्टी दर 1500 रुपए प्रति घन मीटर कर दी थी, लेकिन कंपनी को नियमों का उल्लंघन करते हुए लगभग 800 रुपए प्रति घन मीटर की दर से लाभ दिया गया। 2007–08 में रेवेन्यू विभाग की ओर से रिकवरी नोटिस जारी किए गए, लेकिन राजस्व की वसूली नहीं होने का भी आरोप लगाया है, जिससे राजस्व हानि का आंकड़ा और बढ़ गया।
2021 में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार मड़वा–सिलपतपुरा क्षेत्र में 5685 घन मीटर खनन पाया गया, जिसका 6 मीटर गहराई तक का मूल्यांकन लगभग 18.37 करोड़ रुपए किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि वास्तविक गहराई 40–50 मीटर तक है, जिससे हानि के आंकड़े “सैकड़ों से हजारों करोड़ रुपए” तक पहुंचने का अनुमान है, जिसे कुल मिलाकर 30 हजार करोड़ रुपए तक बताया गया है।
सरकार से मांगें: CBI जांच और तत्काल कार्रवाई
सपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव सहित याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यह है कि इस 30 हजार करोड़ रुपए से जुड़े ग्रेनाइट खनन घोटाले की स्वतंत्र जांच CBI या किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए। इसके साथ‑साथ दोषियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं, राजस्व हानि की वसूली की जाए और प्रभावित ग्रामीणों को उचित मुआवजा दिया जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक पूरी जांच पूरी न हो जाए, तब तक इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाई जाए, ताकि और अधिक राजस्व हानि और पर्यावरणीय नुकसान होने से बचा जा सके। सपा नेताओं का इशारा है कि अगर हाईकोर्ट के ऑर्डर के बावजूद सरकार और अफसर खनन कारोबारी को बचाने में लगे रहे, तो यह जनता के लिए चिंता का विषय होगा और इस मसले को राजनीतिक तौर पर भी उठाया

