भोजशाला पर MP हाईकोर्ट के फैसले का CM डॉ. मोहन यादव ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे सांस्कृतिक विरासत और आस्था के सम्मान से जुड़ा ऐतिहासिक निर्णय बताया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर आए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय बताया है।
सीएम ने कहा कि यह फैसला न केवल एक स्मारक से जुड़ा है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। सरकार न्यायालय के इस निर्णय का पूरी तरह सम्मान करती है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन में पूरा सहयोग करेगी।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 15, 2026
ASI के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा…
सरकार ने फैसले को बताया सांस्कृतिक जीत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारतीय इतिहास और परंपराओं के सम्मान का प्रतीक है। सीएम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हमेशा से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव को बनाए रखना रहा है। उन्होंने प्रदेश की जनता से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील भी की है।
अदालत के फैसले में एक और महत्वपूर्ण निर्देश भी शामिल है, जिसमें लंदन स्थित संग्रहालय से माँ वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने पर विचार करने को कहा गया है। सीएम ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर इस दिशा में हर संभव प्रयास करेगी। उनका कहना है कि कोशिश होगी कि मां सरस्वती की यह प्राचीन प्रतिमा जल्द से जल्द अपने मूल स्थान पर ससम्मान स्थापित हो।

भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट ने माना मंदिर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर माना है। शुक्रवार को धार भोजशाला केस में इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ये परिसर हिंदू मंदिर है और यहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार है। केंद्र सरकार और ASI यह फैसला लें कि भोजशाला मंदिर का मैनेजमेंट कैसा रहेगा। कोर्ट ने ASI के वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर भरोसा जताया और सरकार को ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण की जिम्मेदारी दी।
इसी के साथ अदालत ने ASI का 2003 का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें ASI ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को सरकार से मस्जिद के लिए जमीन मांगने के लिए कहा है। साथ ही अयोध्या केस को फैसले का आधार बताते हुए मुस्लिमों को नमाज की इजाजत देने का आदेश खारिज कर दिया है। वहीं, फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात की है।
पूरी खबर यहां पढ़ें - हाईकोर्ट ने माना धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर, मुस्लिमों...
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब भोजशाला में प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा। पूजा स्थल के रूप में इसे कानूनी मान्यता मिलने के बाद अब इसका संचालन पूरी तरह से एएसआई की देखरेख में होगा। सरकार का कहना है कि इससे स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण और मजबूत होगा। साथ ही धार्मिक गतिविधियों का संचालन भी निर्धारित नियमों के तहत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है और “सर्वधर्म समभाव” की भावना को आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सामाजिक सद्भाव और शांति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस फैसले को संवेदनशीलता के साथ समझें और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहें। सीएम ने साफ किया है कि सरकार न्यायालय के आदेश का पूरा पालन करेगी और साथ ही प्रदेश में शांति, भाईचारा और सांस्कृतिक सम्मान बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
Varsha Shrivastava 
