AIIMS Bhopal में इम्यूनोहीमैटोलॉजी पर राष्ट्रीय कार्यशाला, सुरक्षित रक्ताधान तकनीकों का दिया गया प्रशिक्षण
AIIMS Bhopal में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सुरक्षित रक्त चढ़ाने, एंटीबॉडी जांच और आधुनिक इम्यूनोहीमैटोलॉजी तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में 125 डॉक्टरों, विद्यार्थियों और तकनीकी कर्मचारियों ने भाग लिया तथा मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
एम्स भोपाल के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एवं ब्लड बैंक विभाग द्वारा “इम्यूनोहीमैटोलॉजी” विषय पर सीएमई-सह-कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षित रक्त चढ़ाने और जटिल रक्त जांच तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर (कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, एम्स भोपाल) ने कहा कि सुरक्षित रक्ताधान मरीजों के जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा एम्स भोपाल को ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
देश और विदेश के विशेषज्ञों ने रक्त मिलान, एंटीबॉडी जांच, कूम्ब्स परीक्षण तथा आधुनिक मशीनों से होने वाली जांच प्रक्रियाओं पर जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें चिकित्सक, संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, स्नातकोत्तर विद्यार्थी और तकनीकी कर्मचारी शामिल रहे।
एम्स भोपाल लगातार मरीजों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर कार्य कर रहा है। इसी क्रम में एम्स भोपाल के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एवं ब्लड बैंक विभाग द्वारा “इम्यूनोहीमैटोलॉजी” विषय पर सीएमई-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित रक्त चढ़ाने, रक्त से जुड़ी जटिल समस्याओं की पहचान तथा आधुनिक जांच तकनीकों के बारे में प्रशिक्षित करना था, ताकि मरीजों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी उपचार मिल सके।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर (कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, एम्स भोपाल) द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित रक्ताधान मरीजों के उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे कई गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में रक्ताधान को पहला सफल प्रत्यारोपण माना जाता है, जिसने आधुनिक प्रत्यारोपण चिकित्सा की नींव रखी। उन्होंने यह भी कहा कि एम्स भोपाल भविष्य में मध्य प्रदेश में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में कार्य करेगा।
प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता (चिकित्सा अधीक्षक, एम्स भोपाल) ने ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एवं ब्लड बैंक विभाग को मध्य प्रदेश के पहले एबीओ-असंगत किडनी प्रत्यारोपण में सफल सहयोग के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में विभाग ने एंटीबॉडी की नियमित जांच, निगरानी तथा प्लाज्मा एक्सचेंज के माध्यम से एंटीबॉडी स्तर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे प्रत्यारोपण सफल हो सका।
कार्यक्रम में देश और विदेश के विशेषज्ञों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। इसमें एसजीपीजीआई लखनऊ, अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज फरीदाबाद तथा ग्रिफोल्स, बार्सिलोना (स्पेन) के विशेषज्ञ शामिल रहे। सत्रों में असंगत रक्त मिलान की समस्याओं का समाधान, एड्सॉर्प्शन एवं एल्यूशन तकनीक, एंटीबॉडी टाइट्रेशन में ऑटोमेशन तथा रक्त जांच की आधुनिक प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को कूम्ब्स परीक्षण, एंटीबॉडी टाइट्रेशन तथा एंटीबॉडी स्क्रीनिंग और पहचान प्रक्रियाओं का लाइव प्रदर्शन और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
इस शैक्षणिक कार्यक्रम में 125 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न संस्थानों के संकाय सदस्य, विशेषज्ञ चिकित्सक, मेडिकल ऑफिसर, स्नातकोत्तर विद्यार्थी, सीनियर रेजिडेंट और तकनीकी कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम का समन्वयन ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एवं ब्लड बैंक विभाग के संकाय सदस्यों और रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ।

