बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला फिर गरमाया, 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई

बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में फैसले में देरी को लेकर सियासत गरमा गई है और विपक्ष लगातार जल्द निर्णय की मांग कर रहा है।वहीं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला फिर गरमाया, 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई

भोपाल: मध्यप्रदेश की सियासत में बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और जल्द निर्णय की मांग की। अब इस मामले की अगली सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 29 अप्रैल को होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात, निष्पक्ष फैसले की मांग

मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने कहा कि बीना की जनता विधानसभा अध्यक्ष से निष्पक्ष फैसले की उम्मीद कर रही है।सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उपचुनाव से बचने के लिए इस मामले को जानबूझकर लंबित रख रही है। उनका कहना है कि सभी साक्ष्य पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके हैं, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है।

90 दिन में फैसला जरूरी, लेकिन ढाई साल से लंबित

सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर फैसला होना चाहिए, लेकिन यह मामला करीब ढाई साल से लंबित है। उन्होंने इसे न्याय प्रक्रिया में देरी बताते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।

क्या है पूरा मामला?

बीना से विधायक निर्मला सप्रे 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं थीं। बाद में उनके भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने और रुख बदलने के आरोप लगे।

दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग

विपक्ष का कहना है कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर भाजपा का समर्थन किया, लेकिन औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया। इसी आधार पर उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग की गई है। मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है, जहां यह तय होना है कि उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी या खत्म होगी।