Bhopal Begging Free Campaign: इंदौर मॉडल पर भिक्षावृत्ति मुक्त होगा भोपाल, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बनाई रणनीत
भोपाल को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा इंदौर मॉडल की तर्ज पर अभियान चलाने की रणनीति बना रहे हैं।
भोपाल। राजधानी भोपाल को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने शहर में भिक्षावृत्ति की समस्या को खत्म करने के लिए इंदौर मॉडल को अपनाने की तैयारी की है। इसके तहत शहर के प्रमुख चौराहों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति करने वालों की पहचान कर उनके पुनर्वास पर भी जोर दिया जाएगा। भोपाल के कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा हैं।
चौराहों और धार्मिक स्थलों पर होगी निगरानी
भिक्षावृत्ति की सबसे ज्यादा समस्या शहर के प्रमुख ट्रैफिक सिग्नल, चौराहों और धार्मिक स्थलों के आसपास देखने को मिलती है। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर प्रशासन की टीमें निगरानी करेंगी। उद्देश्य सिर्फ लोगों को सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि उन्हें भिक्षावृत्ति से बाहर निकालकर बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।
इससे पहले भोपाल में भी भिक्षावृत्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इनमें सिग्नल और धार्मिक स्थलों पर भिक्षावृत्ति रोकने के साथ भिक्षा देने वालों पर भी कार्रवाई की व्यवस्था की गई थी।
इंदौर मॉडल से सीख लेगा भोपाल
इंदौर में भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान के तहत भिक्षा मांगने और देने दोनों पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई की गई थी। प्रशासन ने भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों को रेस्क्यू कर पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की थी।
भोपाल में भी इसी तरह भिक्षावृत्ति रोकने के साथ पुनर्वास पर फोकस किए जाने की तैयारी है। यानी अभियान का मकसद सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों को रोजगार, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं से जोड़ना भी होगा।
बच्चों और महिलाओं पर विशेष फोकस
सड़कों और चौराहों पर बच्चों से भिक्षावृत्ति कराने के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन की ओर से बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भिक्षावृत्ति के पीछे संगठित गतिविधियों की आशंका होने पर संबंधित एजेंसियों के जरिए जांच और कार्रवाई भी की जा सकती है। बच्चों को स्कूल, आश्रय और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना अभियान का अहम हिस्सा हो सकता है।
सिर्फ भिखारियों पर कार्रवाई से नहीं बदलेगी तस्वीर
भिक्षावृत्ति रोकने की सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि लोग चौराहों पर भिक्षा देना बंद करें। क्योंकि जब तक भिक्षा देने की प्रवृत्ति बनी रहेगी, तब तक सड़कों पर भिक्षावृत्ति पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होगा।
इसी वजह से प्रशासन की रणनीति में जनजागरूकता को भी अहम हिस्सा बनाया जा सकता है। लोगों से अपील की जाएगी कि सड़क पर सीधे पैसे या सामान देने के बजाय जरूरतमंदों को सरकारी सहायता और पुनर्वास व्यवस्था से जोड़ने में सहयोग करें।
भोपाल को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की कोशिश
राजधानी को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने का अभियान सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी होगी। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कार्रवाई के साथ प्रभावित लोगों के लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
इंदौर में भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान के दौरान निगरानी, रेस्क्यू और पुनर्वास जैसे कदमों पर काम किया गया था। भोपाल में भी इसी मॉडल से सीख लेकर अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

