CBSE का बड़ा बदलाव: कक्षा 9वीं-10वीं के छात्रों को पढ़नी होगी 3 भाषाएं, 1 जुलाई से लागू होगा नियम

9वीं-10वीं के छात्रों के लिए नई भाषा नीति: दो भारतीय भाषाओं के साथ तीसरी भाषा भी जरूरी, CBSE ने जारी किया नोटिफिकेशन, इस साल 10वीं में थर्ड लैंग्‍वेज का पेपर नहीं होगा

CBSE का बड़ा बदलाव: कक्षा 9वीं-10वीं के छात्रों को पढ़नी होगी 3 भाषाएं, 1 जुलाई से लागू होगा नियम

CBSE ने कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए भाषा नीति (Three Language Policy) में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार अब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना जरूरी बताया गया है।

यह बदलाव 1 जुलाई से लागू होने की बात कही जा रही है। हालांकि इस पर स्कूलों और शिक्षा क्षेत्र में अभी चर्चा भी जारी है। इस फैसले का असर देशभर के करीब 50 लाख छात्रों पर पड़ सकता है। खास बात यह है कि इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं होगा, लेकिन पढ़ाई अनिवार्य रहेगी।

जानें क्या है तीन भाषा नीति ?

नई व्यवस्था के तहत छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें एक भाषा भारतीय, दूसरी भी भारतीय और तीसरी भाषा विदेशी या क्षेत्रीय हो सकती है। इसका मकसद छात्रों को भाषा 
शैली में मजबूत बनाना और भारत की विविध भाषाओं से जोड़ना बताया जा रहा है।

NCERT की नई पाठ्यक्रम व्यवस्था और National Education Policy 2020 (NEP 2020) के तहत इस बदलाव को जोड़ा जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों को शुरुआती स्तर पर बहुभाषी बनाने में मदद मिलेगी।

30 जून तक देनी होगी जानकारी

नई नीति के अनुसार स्कूलों को अपनी चुनी हुई तीसरी भाषा की जानकारी 30 जून तक बोर्ड को देनी होगी। इसके बाद 1 जुलाई से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी की जाएगी। CBSE ने स्कूलों को यह भी अनुमति दी है कि वे अपनी सुविधा और छात्रों की पसंद के अनुसार तीसरी भाषा का चयन कर सकते हैं। इसमें स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को भी शामिल किया जा सकता है।

इस साल कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए एक राहत की बात भी है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 10वीं की परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर शामिल नहीं होगा। हालांकि छात्रों को यह भाषा पढ़नी जरूरी होगी और इसकी कक्षा में पढ़ाई जारी रहेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल इसका मूल्यांकन परीक्षा में नहीं होगा, लेकिन भविष्य की शैक्षणिक नीति में यह शामिल किया जा सकता है।

किताबों और पढ़ाई की व्यवस्था

नई व्यवस्था को लागू करने के लिए CBSE और NCERT मिलकर 19 भारतीय भाषाओं में किताबें तैयार कर रहे हैं। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल और तेलुगु जैसी भाषाएं शामिल हैं। जब तक नई किताबें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक कक्षा 9 के छात्रों को कक्षा 6 की थर्ड लैंग्वेज की किताबों से पढ़ाई कराने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही स्थानीय साहित्य जैसे कविताएं और छोटी कहानियां भी पढ़ाई में शामिल करने को कहा गया है।

कई स्कूलों में भारतीय भाषाओं के प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी को देखते हुए CBSE ने लचीलापन दिया है। स्कूलों को कहा गया है कि वे इंटर-स्कूल संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा रिटायर्ड भाषा शिक्षकों की मदद लेने और योग्य पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों की नियुक्ति करने की भी अनुमति दी गई है। कुछ स्कूल हाइब्रिड टीचिंग मॉडल का भी उपयोग कर सकते हैं।

6वीं कक्षा से शुरू हो चुका है बदलाव

यह पूरी व्यवस्था National Education Policy 2020 से जुड़ी हुई मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना है। NEP 2020 को 34 साल बाद शिक्षा में बड़ा सुधार माना जाता है। इस नीति का लक्ष्य छात्रों को केवल रटने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान और कौशल आधारित शिक्षा देना है। इसी के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि CBSE ने इससे पहले 6वीं कक्षा के लिए भी तीन भाषा नीति लागू करने का निर्देश दिया था। इसे अप्रैल 2026 से लागू किया गया था। अब इसे धीरे-धीरे उच्च कक्षाओं तक बढ़ाया जा रहा है ताकि छात्र शुरू से ही भाषा कौशल में मजबूत हो सकें।