सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स और बाहरी लोगों की एंट्री पर बैन, PIL सुनने से Supreme Court ने किया इनकार

पीठ ने जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका को सुनने के इच्छुक नहीं हैं।

सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स और बाहरी लोगों की एंट्री पर बैन, PIL सुनने से Supreme Court ने किया इनकार

नई दिल्ली सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियो बनाने पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने प्रिय मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं। अदालत के इस रुख के बाद याचिका पर इस स्तर पर आगे सुनवाई नहीं हुई।

राजस्थान के आदेश को दी गई थी चुनौती

याचिका में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के उन निर्देशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और गतिविधियों की रिकॉर्डिंग के लिए अनुमति जरूरी की गई है। मामला खास तौर पर राजस्थान के 16 अगस्त 2026 के सर्कुलर से जुड़ा था। इसमें कहा गया था कि किसी बाहरी व्यक्ति को सरकारी स्कूल में जाने से पहले प्रधानाचार्य से अनुमति लेनी होगी।

फोटो और रिकॉर्डिंग के लिए भी अनुमति जरूरी

राजस्थान के निर्देश में स्कूल परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग के लिए भी पहले से लिखित अनुमति लेने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि ऐसे नियमों का असर पत्रकारों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के काम पर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने इन प्रतिबंधों को जनहित में जानकारी जुटाने और साझा करने की स्वतंत्रता से जोड़ा था।

‘School Thik Karo’ अभियान का भी जिक्र

याचिका में ‘School Thik Karo’ अभियान का उल्लेख किया गया। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने लाना बताया गया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि स्कूल सार्वजनिक संस्थान हैं। वहां भवन, कक्षाओं, शौचालय, पेयजल, बिजली और मिड-डे मील जैसी सुविधाओं की स्थिति को रिकॉर्ड करना जनहित से जुड़ा विषय हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के आदेश का भी मामला

याचिका में उत्तर प्रदेश के अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के 19 अगस्त 2026 के आदेश को भी चुनौती दी गई थी। इसमें बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को बिना अनुमति स्कूलों में प्रवेश करने या फोटो-वीडियो बनाने से रोकने की बात कही गई थी। याचिका के अनुसार, आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा सहित कई जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।

मौलिक अधिकारों का दिया हवाला

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इन प्रतिबंधों से संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(g), 21 और 21-A के तहत मिले अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में वैध पत्रकारिता और सार्वजनिक संस्थानों से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाना भी शामिल है। हालांकि, याचिका में बच्चों की निजता, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा को भी जरूरी माना गया।

बच्चों की तस्वीर और स्कूल की हालत अलग विषय

याचिका में बच्चों की पहचान योग्य तस्वीर या वीडियो बनाने और स्कूल की भौतिक स्थिति रिकॉर्ड करने के बीच अंतर बताया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, बच्चों की निजता की रक्षा के लिए बनाए गए नियमों का इस्तेमाल स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को जनहित में रिकॉर्ड करने पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।