गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल से 100 दिवसीय 'टीबी मुक्त भारत' अभियान की शुरुआत, डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने किया शुभारंभ
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस के अवसर पर भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से प्रदेश में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ किया।
भोपाल। विश्व टीबी दिवस के अवसर पर राजधानी स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रदेश में “टीबी मुक्त भारत” के लक्ष्य को गति देने के लिए 100 दिवसीय विशेष अभियान का शुभारंभ किया।

टीबी उन्मूलन को जनआंदोलन बनाने पर जोर
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी प्रयासों से पूरी नहीं हो सकती, बल्कि इसे एक जनआंदोलन का रूप देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों, छात्रों और स्वयंसेवी संगठनों से इस अभियान को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इसी दिशा में यह 100 दिवसीय विशेष अभियान एक महत्वपूर्ण कदम है।
समय पर पहचान और उपचार पर विशेष ध्यान
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि टीबी जैसी बीमारी के उन्मूलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है—समय पर पहचान, नियमित उपचार और पर्याप्त पोषण। उन्होंने कहा कि यदि रोग की शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर ली जाए तो इसका इलाज सरल और प्रभावी हो जाता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे टीबी जांच को लेकर किसी भी तरह की झिझक न रखें और समय-समय पर जांच कराएं। उन्होंने निक्षय पोषण योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
13,428 फोकस क्षेत्रों में सघन स्क्रीनिंग अभियान
राज्य सरकार ने इस अभियान को तकनीकी रूप से भी मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रीडिक्टिव एनालिसिस के माध्यम से प्रदेश के 13,428 फोकस क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में विशेष रूप से सघन स्क्रीनिंग और जांच अभियान चलाया जाएगा।

इन चिन्हित इलाकों में शहरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी और संदिग्ध मरीजों को तुरंत उपचार से जोड़ा जाएगा।
एआई तकनीक से बढ़ेगी जांच की गति
कार्यक्रम में बताया गया कि टीबी उन्मूलन अभियान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में 86 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे दूरस्थ और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी तेजी से जांच संभव हो सकेगी।

इन मशीनों की मदद से शुरुआती अवस्था में ही टीबी के मामलों की पहचान करना आसान होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि उपचार की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।
निक्षय पोर्टल और डिजिटल मॉनिटरिंग की भूमिका
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सभी मरीजों का डेटा NIKSHAY Portal पर दर्ज किया जा रहा है, जिससे उपचार की निगरानी और फॉलो-अप में आसानी हो रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी मरीज उपचार से वंचित न रहे।

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग लगातार डेटा एनालिसिस के माध्यम से बीमारी के फैलाव और नियंत्रण पर नजर रख रहा है।
निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण सहायता
कार्यक्रम के दौरान टीबी मरीजों को फूड बास्केट भी वितरित किए गए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि टीबी मरीजों के लिए पोषण उपचार का एक अहम हिस्सा है। इसीलिए सरकार निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को आर्थिक और पोषण सहायता प्रदान कर रही है।

उन्होंने समाज के लोगों से भी अपील की कि वे टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आएं और उन्हें पोषण संबंधी सहयोग प्रदान करें, ताकि उनका इलाज तेजी से पूरा हो सके।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार का फोकस
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, बेहतर चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी मरीज को संसाधनों की कमी के कारण अन्यत्र रेफर न करना पड़े और उसे स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।
टीबी नियंत्रण में प्रदेश की प्रगति
गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. कविता सिंह ने बताया कि प्रदेश में टीबी नियंत्रण के क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहा है। सक्रिय केस फाइंडिंग, बेहतर रिपोर्टिंग और उपचार व्यवस्था के कारण टीबी नोटिफिकेशन दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में यह दर 6 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 11.48 प्रतिशत हो गई है। यह इस बात का संकेत है कि अधिक से अधिक मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जा रहा है।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस 100 दिवसीय विशेष अभियान और जनभागीदारी के माध्यम से मध्यप्रदेश टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। तकनीक, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के संयुक्त प्रयासों से आने वाले वर्षों में टीबी मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकेगा।
Varsha Shrivastava 
