अफसरों के शाही खर्च पर सर्जिकल स्ट्राइक हवाई सफर पर ब्रेक, करनी होगी कार-पूलिंग
अफसरों के शाही खर्च पर सर्जिकल स्ट्राइक हवाई सफर पर ब्रेक, करनी होगी कार-पूलिंग, शाम 7 के बाद दफ्तरों में नहीं चलेंगे एसी
भोपाल: मप्र में अफसरों के शाही ठाठ-बाट के दिन खत्म होने वाले हैं। वैश्विक आर्थिक मंदी और वित्तीय बोझ के बीच सामान्य प्रशासन विभाग ने दो बड़े बदलाव लागू किए हैं, जिनसे वल्लभ भवन से लेकर कलेक्टोरेट तक हलचल है। सरकार ने खर्च बचाने के लिए अफसरों के हवाई सफर पर इमरजेंसी ब्रेक लगाते हुए कार-पूलिंग और शाम 7 बजे के बाद दफ्तरों में एसी-लाइट बंद करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर पोर्टल के जरिए राय देने वालों की पहचान और डेटा को गोपनीय रखने सीक्रेट कोड लागू किया है। साथ ही, छोटी-छोटी पैरवी के लिए दिल्ली-मुंबई दौरों पर रोक लगाई दी है।
GAD के नए फरमान से क्या-क्या बदलाव होंगे...
- अब छोटी-मोटी पैरवी या केंद्र के विभागों के चक्कर काटने अफसर दिल्ली या मुंबई नहीं भाग सकेंगे। प्रदेश के बाहर की यात्रा अतिआवश्यक स्थितियों में ही स्वीकृत होंगी। सचिव स्तर के अफसरों की बाहर की यात्राओं को सीएस की मंजूरी जरूरी।
- बिजली खर्च घटाने सभी सरकारी भवनों का एनर्जी ऑडिट होगा। कार्यालय समय समाप्ति के उपरांत, विशेष रूप से शाम 7 बजे के बाद, गैर-जरूरी एसी, लाइट, कंप्यूटर, प्रिंटर और लिफ्ट को सख्ती से बंद करना होगा।
- मंत्रालय के अफसरों, कलेक्टरों व विभागाध्यक्षों को अब अपनी चमचमाती व्यक्तिगत गाड़ियों का मोह छोड़कर कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन कार-पूलिंग या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने को कहा गया है।
आदेश में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लीथियम, कोबाल्ट, कॉपर और कोल जैसे खनिजों की माइनिंग लीज और अप्रूवल की फाइलों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर तुरंत क्लियर करने को कहा गया है, ताकि इनके आयात का खर्च बच सके।
UCC में सुझाव देने वालों के नाम रहेंगे ‘टॉप सीक्रेट’ सरकार ने यूसीसी पर सुझाव देने की डेडलाइन 15 से बढ़ाकर 22 जून कर दी है, साथ ही तय किया है कि नागरिक द्वारा दिया गया सुझाव व्यक्तिगत होगा और इसे पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा। डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, ताकि जनता बिना किसी डर के राय दे सकें। बेहतर प्रचार के नाम पर हर ग्राम पंचायत से कम से कम 10-10 सुझाव अनिवार्य रूप से पोर्टल पर दर्ज कराने की जिम्मेदारी सीधे पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों को दे दी गई है।

