परंपरा और आधुनिकता का संगम: केन फर्नीचर ने भोपाल में बनाई खास पहचान
केन लकड़ी की पारंपरिक असमिया केन लकड़ी से सात पीढ़ियों से चल रहे शिल्प में छीलने, भिगोने और गर्म करके आकार देने की प्रक्रिया से टिकाऊ और सुंदर फर्नीचर बनाया जाता है, जिसकी मांग आज भोपाल में बढ़ रही है।
भोपाल: भारतीय शिल्पकला का एक अनूठा और प्राचीन हिस्सा, केन की लकड़ी से बना फर्नीचर, अब भोपाल में अपनी विशेष पहचान बना रहा है। असम की नदियों और पानी से निकाली जाने वाली केन लकड़ी का इस्तेमाल इस फर्नीचर में किया जाता है, जो अपने अद्वितीय गुणों और खूबसूरती के कारण प्रसिद्ध है। केन लकड़ी से बने फर्नीचर की सबसे बड़ी खासियत इसकी टिकाऊपन, दीमक प्रतिरोधक क्षमता और आकर्षक सौंदर्य में निहित है। फर्नीचर पर पॉलिशिंग करके इसे और भी चमकदार और आकर्षक बनाया जाता है, यह न केवल लंबे समय तक अपनी मजबूती और गुणवत्ता बनाए रखता है, बल्कि किसी भी घर की सजावट में एक शाही और पारंपरिक छवि भी जोड़ता है।

असम में प्रसिद्ध है केन की लकड़ी..
पहले यह फर्नीचर केवल राजा-महाराजाओं के महलों में ही देखने को मिलता था, लेकिन अब आधुनिक डिजाइन और पारंपरिक शिल्पकला के कारण यह आम लोगों के घरों में भी लोकप्रिय हो गया है। हल्की होने के बावजूद केन लकड़ी बेहद मजबूत होती है और इसका प्राकृतिक बनावट वाला आकर्षण किसी भी फर्नीचर को आकर्षक बनाता है।

केन फर्नीचर की बढ़ती लोकप्रियता
यही कारण है कि इस फर्नीचर की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है और यह केवल उपयोगिता के लिए नहीं, बल्कि अपने सांस्कृतिक और कलात्मक महत्व के कारण भी लोगों के बीच पसंद किया जा रहा है। भोपाल जैसे शहरों में यह फर्नीचर अब अपनी जगह बना रहा है, और यह साबित कर रहा है कि पारंपरिक भारतीय शिल्पकला आज भी आधुनिक जीवनशैली में जीवंत और प्रासंगिक है। इस लकड़ी का उपयोग कुर्सियाँ, टेबल, सोफे और अलमारी और भी कई तरह की वस्तुएं बनाने के लिए किया जाता है।

सात पीढ़ियों से जारी शिल्पकला की विरासत
कारीगर अमर सिंह बताते है कि हमारी सात पीढीयां यह काम कर रही है। यह असम की लकड़ी है।पहले केन की लकड़ी को हम काटते हैं फिर उसकी गठान साफ करते हैं फिर लकड़ी अंगार पर गर्म की जाती हैं फिर लकड़ी को साफ किया जाता है. किसी भी सामान जेसे कुर्सियाँ, टेबल, सोफे को आकर देने की लिए कील से ठुकाई भी की जाती हैं. इस काम को करने में समय लगता है।आगे उन्होने कहा कि मेरी सात पीढ़ियां ये काम कर रही हैं।

युवा कारीगर अमित सिंह बताते हैं कि केन की लकड़ी असम राज्य से आती है। इसको हम ऑर्डर पर मंगवाते हैं ...केन की लकड़ी की कुर्सी बनाने के लिए सबसे पहले लकड़ी को छिला जाता है उसके बाद लकड़ी को भिगोया जाता हैं जिसके बाद केन की इस लकड़ी को आकर दिया जाता है। में बचपन से ही यह काम कर रहा हूं।
sanjay patidar 
