Pune Porsche Car Case: सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दी
पुणे पोर्श कार केस में सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दी और कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी भी उतनी ही होती है।
2024 के चर्चित पुणे पोर्श कार केस में सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में माता-पिता की जिम्मेदारी भी उतनी ही होती है, उन्हें अपने नाबालिग बच्चों पर कंट्रोल रखना चाहिए। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि "नशे की समस्या अलग बात है, लेकिन बच्चों को कार की चाबियां और खुला पैसा देना ताकि वे ऐश कर सकें, यह बिल्कुल अस्वीकार्य है।" फैसला जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने किया।

पुणे में 18-19 मई 2024 की रात, तेज रफ्तार पोर्श कार चला रहे 17 साल के लड़के ने बाइक को टक्कर मार दी थी, जिससे बाइक पर सवार दो लोगों की मौत हो गई थी। नाबालिग को पहले जमानत मिली, लेकिन बाद में विवाद के चलते रद्द कर दी गई और ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया; जून 2024 में हाई कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया। जिसके बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुनाया।

इन्हें मिली जमानत
इस मामले में अमर संतोष गायकवाड़, आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को जमानत मिली है। अमर संतोष गायकवाड़ पर आरोप है कि उसने तीन लाख रुपये देकर नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल बदलवाया था। इस केस में आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल के खून के सैंपल जांच में इस्तेमाल किए गए थे।


