MP में रोबोट बताएंगे पानी और सीवर लाइन के लीकेज, पोर्टल-ऐप से होगी पाइपलाइन नेटवर्क की डिजिटल निगरानी

Indore में दूषित पानी से कई मौतों के बाद मध्यप्रदेश सरकार शहरी जलापूर्ति व्यवस्था को तकनीक से मजबूत करने जा रही है। अब प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में वाटर सप्लाई और सीवर लाइन का पूरा रूट-मैप ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगा। जहां पानी और सीवर लाइन मिलती हैं, वहां रोबोटिक सिस्टम से बिना खुदाई लीकेज की जांच की जाएगी।

MP में रोबोट बताएंगे पानी और सीवर लाइन के लीकेज, पोर्टल-ऐप से होगी पाइपलाइन नेटवर्क की डिजिटल निगरानी
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इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश की शहरी जलापूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना से सबक लेते हुए अब मध्यप्रदेश का नगरीय प्रशासन विभाग एक बड़ा और तकनीकी कदम उठाने जा रहा है।

राज्य के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों की वाटर सप्लाई और सीवर लाइन का पूरा नेटवर्क अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिससे पाइपलाइन नेटवर्क की रियल-टाइम निगरानी संभव हो सकेगी।

413 नगरीय निकाय होंगे कवर

नगरीय प्रशासन विभाग के GIS एक्सपर्ट देवराज त्रिपाठी के अनुसार AMRUT REKHA नाम से एक पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर प्रदेश के 413 नगरीय निकायों की वाटर सप्लाई और सीवरेज लाइनों की GIS मैपिंग अपलोड की जा रही है।
इस पोर्टल के जरिए अधिकारियों को पूरे शहर का डिजिटल रूट-मैप मिलेगा, जबकि फील्ड इंजीनियर मोबाइल ऐप के माध्यम से ग्राउंड लेवल पर मॉनिटरिंग और मरम्मत का काम करेंगे।

ओवरहेड टैंक (OHT) की होगी सख्त निगरानी

इंदौर की घटना के बाद अब सभी OHT की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। तय मानकों के अनुसार उनकी सफाई कराई जाएगी और सफाई की पूरी प्रक्रिया का वीडियो पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पानी की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न हो।

रोबोटिक सिस्टम से होगी लीकेज की पहचान

जहां वाटर सप्लाई लाइन और सीवर लाइन आपस में मिलती हैं, उन इंटरसेक्शन पॉइंट्स को पोर्टल पर यलो मार्क से चिन्हित किया जाएगा। इन संवेदनशील स्थानों पर रोबोटिक सिस्टम की मदद से जांच की जाएगी।
खास बात यह है कि यह जांच बिना खुदाई की जाएगी। रोबोटिक सेंसर यह पता लगाएंगे कि कहीं पाइपलाइन में लीकेज तो नहीं है। यदि लीकेज पाया गया, तो तत्काल मरम्मत कराई जाएगी।

हर शहर में तय होंगे जंक्शन पॉइंट

हर नगरीय निकाय क्षेत्र में वाटर और सीवर लाइन के जंक्शन पॉइंट पहले से तय किए जाएंगे। इन पॉइंट्स पर नियमित रूप से रोबोटिक इंस्पेक्शन किया जाएगा। यदि किसी स्थान पर लीकेज नहीं मिलता है, तो अगले पॉइंट की जांच की जाएगी, जिससे पूरे नेटवर्क की चरणबद्ध निगरानी हो सके।

AMRUT REKHA प्लेटफॉर्म दो हिस्सों में काम करेगा।

वेब पोर्टल: अधिकारियों के लिए, जहां पूरे शहर का वाटर और सीवर नेटवर्क डेटा उपलब्ध रहेगा।

मोबाइल ऐप: फील्ड इंजीनियरों के लिए, जिससे वे मौके पर जाकर ग्राउंड वेरिफिकेशन, रिपेयरिंग और रिपोर्टिंग कर सकेंगे।

इस तकनीकी व्यवस्था के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में दूषित पानी से होने वाली घटनाओं को रोका जा सके और शहरी जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।