सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर बड़ा अपडेट, साल में दो बार होगी DPC; 10 साल की रुकी पदोन्नति की भरपाई की तैयारी

मध्य प्रदेश सरकार सरकारी कर्मचारियों को साल में दो बार प्रमोशन देने की तैयारी कर रही है. सितंबर में DPC होने की संभावना है. 2016 से 2026 तक रुकी पदोन्नति की भरपाई के लिए प्रोफार्मा प्रमोशन समेत विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर बड़ा अपडेट, साल में दो बार होगी DPC; 10 साल की रुकी पदोन्नति की भरपाई की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए प्रमोशन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. प्रदेश सरकार अब साल में दो बार विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC (Departmental Promotion Committee) की प्रक्रिया कराने की तैयारी में है. इसका मकसद लंबे समय से अटकी पदोन्नतियों को पूरा करना और आगे प्रमोशन की प्रक्रिया को नियमित रखना है.

सरकार की इस कवायद से उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पदोन्नति पिछले कई वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक कारणों से अटकी हुई है. सितंबर में अगली DPC आयोजित किए जाने की तैयारी है. हालांकि पूरी प्रक्रिया न्यायालय में लंबित मामलों के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी.

10 साल से अटकी है प्रमोशन की प्रक्रिया

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में रहा है. 2016 के बाद प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक जैसी स्थिति बनने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो गए.

अब सरकार इस लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नए रास्ते पर काम कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2026 के बीच रुकी पदोन्नतियों की भरपाई के लिए विशेष व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है.

दो विकल्पों पर सरकार कर रही विचार

सरकार के सामने मुख्य रूप से दो विकल्प बताए जा रहे हैं. पहला विकल्प प्रोफार्मा पदोन्नति का है. इसके तहत कर्मचारी को कागजी तौर पर पदोन्नति का लाभ दिया जा सकता है. दूसरा विकल्प प्रमोशन के लिए जरूरी 5 साल की अनिवार्यता में छूट देने का है. सरकार इन विकल्पों में से किसी एक व्यवस्था के जरिए लंबे समय से लंबित पदोन्नति की समस्या को सुलझाने की तैयारी में है.

क्या होती है प्रोफार्मा पदोन्नति?

प्रोफार्मा प्रमोशन को आसान भाषा में कागजी पदोन्नति कहा जा सकता है. इसमें कर्मचारी को पदोन्नति का सेवा रिकॉर्ड संबंधी लाभ दिया जाता है, लेकिन उस पद पर वास्तविक कार्यभार या वेतन लाभ परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकता है. सरकार इसी विकल्प के जरिए पुराने प्रमोशन के अंतर को भरने पर विचार कर रही है. हालांकि इसका अंतिम स्वरूप अभी तय होना बाकी है.

54 विभागों में चल रही प्रमोशन की तैयारी

प्रदेश के सभी 54 विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी है. विभागों में पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता और पदों से जुड़ी जानकारी के आधार पर DPC की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 में नए पदोन्नति नियम भी जारी किए थे. सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 जारी किए थे.

करीब एक लाख कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर

पदोन्नति विवाद का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ा, जो वर्षों तक प्रमोशन का इंतजार करते रहे और बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से 2026 के बीच करीब एक लाख अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हुए हैं. फिलहाल इन कर्मचारियों को लेकर अलग से क्या व्यवस्था होगी, यह स्पष्ट नहीं है.

अगले साल से नियमित DPC की तैयारी

सरकार की कोशिश सिर्फ पुरानी पदोन्नति का बैकलॉग खत्म करने तक सीमित नहीं है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी हाल ही में कहा है कि अब प्रदेश में DPC नियमित रूप से हर साल आयोजित की जाएगी, ताकि कर्मचारियों की पदोन्नति लंबे समय तक लंबित न रहे.  इससे वरिष्ठता सूची और कैडर में लंबे समय से बनी विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का रहेगा असर

सरकार की ओर से आगे बढ़ाई जा रही पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी मामलों से मुक्त नहीं है. प्रमोशन से जुड़े मामले अदालत में लंबित हैं. इसलिए मौजूदा प्रक्रिया और इससे होने वाली पदोन्नतियां अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी.