विभिन्न समस्याओं को लेकर मऊगंज में कांग्रेस का हल्लाबोल कलेक्ट्रेट का घेराव कर सौंपा ज्ञापन
विभिन्न समस्याओं को लेकर मऊगंज में कांग्रेस का हल्लाबोल बिजली संकट और आदिवासियों के बेदखली पर कलेक्ट्रेट का घेराव कर सौंपा ज्ञापन, कहा सात दिन में समाधान नहीं तो होगा उग्र आंदोलन
राजेंद्र पयासी मऊगंज: बदहाल विद्युत व्यवस्था और जिला क्षेत्र अंतर्गत बेलौही गांव में आदिवासी परिवारों की बेदखली के विरोध में कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ हल्लाबोला। पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना के नेतृत्व में जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिलाल कोल, पूर्व जिला अध्यक्ष पद्मेश गौतम, नगर अध्यक्ष विवेक गुप्ता सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने बिजली सुधार और आदिवासियों के पुनर्वास के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंप कर चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मांगे पूरी नहीं हुई तो विद्युत विभाग का घेराव, धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन होगा।
ज्ञापन में कहा गया कि मऊगंज जिले में विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती का दौर जारी है। लो-वोल्टेज, बार बार फाल्ट और अनियमित आपूर्ति से आम लोग बेहाल हैं। किसानों की खरीफ की तैयारी प्रभावित हो रही है। धान रोपा डालने हेतु सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा। व्यापारियों का कारोबार ठप है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। छोटे दुकानदारों को इनवर्टर और जनरेटर पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि विभाग उपभोक्ताओं को बढ़े हुए और त्रुटिपूर्ण बिल थमा रहा है। मीटर रीडिंग बिना लिए ही अनुमानित बिल भेजे जा रहे हैं। कई गांवों में जर्जर तार झूल रहे हैं और ट्रांसफार्मर महीनों से खराब पड़े हैं। शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं होती। ज्ञापन में मांग की गई कि अघोषित कटौती तुरंत बंद हो, गलत बिलों की जांच कर सुधार किया जाए, लो-वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। साथ ही जर्जर तारों और जले ट्रांसफार्मरों को प्राथमिकता पर बदला जाए। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष टीम गठित करने और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई।
बिजली मुद्दे के साथ पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने बेलौंही गांव निवासी आदिवासी परिवारों को जमीन से बेदखल किए जाने का मामला भी प्रमुखता से उठाया। बन्ना ने कहा कि ये परिवार 30 से 40 साल से वहां निवास कर रहे हैं। उनके नाम के बिजली कनेक्शन हैं, राशन कार्ड बने हैं और वे शासन की योजनाओं का लाभ भी ले रहे हैं। ऐसे में बिना किसी पुनर्वास योजना के बारिश के मौसम में उन्हें उजाड़ना अमानवीय है। बन्ना ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश की आड़ लेकर गरीबों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शासन आवास योजना में घर दे रहा है तो पुराने बसे लोगों के आशियाने क्यों तोड़े जा रहे हैं। यदि किसी भूमि को खाली कराना जरूरी है तो पहले परिवारों के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। बारिश में खुले आसमान के नीचे महिलाएं और बच्चे कहां जाएंगे।
एक सप्ताह में निर्णय न होने पर आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के बाद पूर्व विधायक ने कहा कि मऊगंज की जनता दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ बिजली नहीं मिल रही, दूसरी तरफ आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा है। यह सरकार की जनविरोधी नीतियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। यदि सात दिन में बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और आदिवासी परिवारों के लिए उचित निर्णय नहीं लिए गया तो जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में किसान और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने बिजली विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। जनता के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।

