अतिवृष्टि के बाद CM डॉ. मोहन यादव का Rewa दौरा; बाढ़ राहत को लेकर अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
रीवा में हुई अतिवृष्टि एवं उससे उत्पन्न बाढ़ की स्थिति जानने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रीवा पहुंचे। जहां राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को पूरी गंभीरता और तत्परता से संचालित करने के निर्देश दिए।
रीवा में अतिवृष्टि-बाढ़ के बाद CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन! मुख्यमंत्री ने राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा कर प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाने के निर्देश दिए। #RewaFlood #MohanYadav #MPNews #FloodAlert pic.twitter.com/T38mXfpwP1
— Public Vani News (@publicvaninews) August 23, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि, जिन क्षेत्रों में अभी भी बाढ़ का पानी मौजूद है, वहां राहत शिविरों का बेहतर संचालन सुनिश्चित किया जाए। शिविरों में पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहें। जिन लोगों के घर अथवा खाने-पीने का सामान बाढ़ में नष्ट हुआ है, उन्हें आरबीसी-64 के प्रावधानों के तहत तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। राहत शिविरों में साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों से बाढ़ का पानी उतर चुका है, वहां तत्काल शासकीय अमले को भेजकर प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि लोगों को भोजन और पेयजल की कोई परेशानी न हो। पेयजल की शुद्धता के लिए सभी जल स्रोतों और हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर आदि के माध्यम से क्लोरीनेशन कराने के निर्देश भी दिए गए।
रीवा में अतिवृष्टि एवं राहत कार्यों की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिए ये निर्देश:-
बाढ़ राहत
- जहां अभी भी बाढ़ का पानी है वहां राहत कैंप अच्छी तरह से संचालित किए जाएं।
- राहत कैंपों में समुचित मात्रा में खाद्य सामग्री, पीने के पानी एवं चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करें।
- यदि लोगों का खाने पीने का सामान, घर इत्यादि नष्ट हो गए हों उन्हें तत्काल आरबीसी 64 के तहत सहायता उपलब्ध कराएं।
- शिविरों में साफ सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाए।
- जहां बाढ़ का पानी उतर गया है वहां शासकीय अमले को भेजें, लोगों को खाने-पीने की किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
- पीने के पानी की शुद्धता के लिए सभी जल स्रोतों एवं हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर इत्यादि से क्लोरिनेशन कराएं।
- ऐसे सभी गांव में और नगरी क्षेत्र के वार्डों में जहां बाढ़ का प्रकोप रहा है वहां विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करें।
- बुखार एवं सर्दी जुकाम के मरीज को भी गंभीरता से लिया जाए, किसी तरह की महामारी की स्थिति निर्मित ना हो।
- जिन गांवों में अति वर्षा से विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई हो उसे तत्काल बहाल करें।
- पशु चिकित्सा विभाग को भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में जानवरों के इलाज में भेजें, किसी तरह की महामारी नहीं फैलनी चाहिए और यदि पशुओं की मृत्यु हुई हो तो उनका वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोजल करें।
- गौशालाओं इत्यादि में पशुओं के खाने-पीने एवं चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- यदि फसल क्षति की सूचना हो तो वहां तत्काल सर्वे कराएं। यदि बुवाई वगैरा प्रारंभिक अवस्था में हो तो उसके नष्ट होने पर बीज इत्यादि की व्यवस्था करें।
- राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, कृषि विभाग इत्यादि के अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके कार्य स्थल/फील्ड में रहना सुनिश्चित करवाएं। इनके दल बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजें।
- सभी नगरी निकायों एवं गांव में साफ सफाई का एक विशेष अभियान प्रारंभ करें ताकि किसी तरह की बीमारी न फैले।



