भोपाल में शराब टेंडर की नीलामी में एक भी बोली नहीं, ठेकेदार के इशारों पर आबकारी अधिकारी

राजधानी भोपाल में इस वर्ष आबकारी विभाग की टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले राउंड की बोली पूरी हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक भी ठेकेदार ने हिस्सा नहीं लिया।

भोपाल में शराब टेंडर की नीलामी में एक भी बोली नहीं, ठेकेदार के इशारों पर आबकारी अधिकारी

भोपाल। राजधानी में इस वर्ष आबकारी विभाग की टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले राउंड की बोली पूरी हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक भी ठेकेदार ने हिस्सा नहीं लिया।

अनुभव पर उठे सवाल

भोपाल के AC वीरेंद्र धाकड़ काफी जूनियर अधिकारी हैं। उन्हें बड़े जिलों का बिल्कुल अनुभव नहीं है। फिर भी एक अधिकारी ने अपनी जिद में इनको राजधानी भोपाल में पदस्थापना करा दी थी। इसी कारण भोपाल की स्थिति को लेकर लगातार सुर्खियां बनी रही। शिकायतों के बावजूद न तो मननानी रेटों पर शराब बिकना बंद हुई और न ही लोगों को अपनी पसंद की ब्रांड मिली। ऐसा लगता है कि, आबकारी विभाग के अधिकारी ठेकेदार के इशारों पर काम करते हैं.इसी कारण वीरेंद्र धाकड़ लोगों का कॉल रिसीव नहीं करते। 

कॉल रिसीव नहीं करते वीरेंद्र धाकड़

पब्लिक वाणी की टीम ने जब उन्हें कॉल करके ये पूछने की कोशिश की  कि, पहली बोली में एक भी टेंडर क्यों नहीं आया। तो उन्होंने कॉल तक रिसीव नहीं किया। आबकारी विभाग द्वारा जो आदेश जारी किया गया है उसमें 3 राउंड में टेंडर होना है। पहला राउंड खत्म हो गया जिसमें एक भी ठेकेदार शामिल नहीं हुआ। शायद भोपाल में ऐसा पहली बार हुआ है।

अभी दो बार बोली और होगी. उसमें देखना है कि ठेकेदार आते हैं कि नहीं आते हैं। पिछले साल भोपाल का टेंडर 80 करोड़ रुपए अधिक में गया था। इस वर्ष की हालत के लिए आबकारी विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं। ऐसा लगता है कि, सरकार को भी अपनी आय बढ़ाने में ज्यादा रूचि नहीं है। शायद इसी कारण पहली बार जिलों में टेंडर प्रकिया शुरू हो चुकी है। लेकिन आधा दर्जन जिलों में जिला अधिकारी नहीं है।

तीन चरणों में होगी टेंडर प्रक्रिया

आबकारी विभाग के आदेश के अनुसार, इस बार टेंडर प्रक्रिया तीन राउंड में पूरी की जानी है। पहला राउंड समाप्त हो चुका है। अब दो और चरण शेष हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी राउंड में ठेकेदार भाग लेते हैं या नहीं।

  • पहला राउंड समाप्त — एक भी बोली नहीं
  • दूसरा राउंड- 3 मार्च 5 मार्च
  • तीसरा राउंड- 6 मार्च से 7 मार्च

अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में जिला अधिकारी के पद रिक्त हैं। कुछ अधिकारियों के पास दो-दो जिलों का अतिरिक्त प्रभार है। इससे नई टेंडर प्रक्रिया और नियमित समीक्षा में बाधा आ रही है, जिसका असर सरकारी आय पर भी पड़ रहा है।

अब आगे क्या?

अब सबकी निगाहें अगले दो राउंड की बोली पर टिकी हैं। क्या ठेकेदार इसमें भाग लेंगे? क्या विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाएगी? और क्या खाली पदों को जल्द भरा जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ जाएंगे।

भोपाल में शराब दुकानों की नीलामी 2 मार्च को हुई। इसकी रिजर्व प्राइस करीब 520 करोड़ रुपए रखी गई है। वहीं, सभी 87 शराब ठेकों की रिजर्व प्राइस 1432 करोड़ रुपए है। मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था में शराब दुकानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटा है। भोपाल की 87 दुकानों को 20 ग्रुप में बांटा है। जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए होगी।