महंगे गिफ्ट, पुलिस से पहचान और लग्जरी कारों का जाल: इंदौर का ठग संजय कालरा गिरफ्तार

इंदौर में ठगी की दुनिया का एक ऐसा चेहरा बेनकाब हुआ, जिसने पुलिस की वर्दी, अफसरों की पहचान और लग्जरी लाइफस्टाइल को अपने अपराध का हथियार बना लिया था।

महंगे गिफ्ट, पुलिस से पहचान और लग्जरी कारों का जाल: इंदौर का ठग संजय कालरा गिरफ्तार

इंदौर में ठगी की दुनिया का एक ऐसा चेहरा बेनकाब हुआ, जिसने पुलिस की वर्दी, अफसरों की पहचान और लग्जरी लाइफस्टाइल को अपने अपराध का हथियार बना लिया। नाम है संजय कालरा उर्फ संजय कारिरा, एक ऐसा शातिर ठग, जो खुद को रसूखदार साबित करने के लिए IPS अधिकारियों को महंगे मोबाइल और उपहार देता था, और इसी आड़ में करोड़ों की ठगी को अंजाम देता रहा।

कहानी की शुरुआत केशर बाग रोड निवासी राधिका सोलंकी से होती है। राधिका राजवाड़ा में रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाती हैं और घर के पास उनका 1500 वर्ग फीट का वाशिंग सेंटर है। तीन साल पहले उन्होंने यह सेंटर परिचित वैभव जोशी को किराए पर दिया

भरोसे का रिश्ता ठगी की पहली सीढ़ी बना

वैभव ने राधिका की अनुमति के बिना वाशिंग सेंटर संजय कालरा को सौंप दिया। जब राधिका ने विरोध किया, तो कालरा ने धमकियों दी और बड़े अफसरों के नाम गिनाए, पुलिस की पहुंच का डर दिखाया और यहां तक कह दिया कि अब ये दुकान मेरी हो चुकी है।

धमकी, फिरौती और डराने का आरोप

आरोपी ने राधिका से 20 लाख रुपए कैश की मांग की और महिलाओं को खुलेआम धमकाया। डर के बजाय राधिका ने हिम्मत दिखाई और सीधे पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के पास पहुंचकर पूरी कहानी रख दी। कमिश्नर ने जब आरोपी की पृष्ठभूमि खंगाली, तो सामने आया कि संजय कालरा पहले भी इसी तरह के कई फर्जीवाड़े कर चुका है।

पुलिस की जांच और फिल्मी गिरफ्तारी

जोन-4 डीसीपी आनंद कलादगी के निर्देश पर अन्नपूर्णा टीआई अजय नायर ने केस दर्ज किया। मोबाइल की टॉवर लोकेशन निकाली गई और हैरानी की बात यह थी कि आरोपी डीसीपी ऑफिस (एमओजी लाइन) में मौजूद था। पुलिस ने वहीं घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

लग्जरी कारों की ठगी का पूरा खेल

पूछताछ में खुलासा हुआ कि कालरा लोगों से लग्जरी कारें किराए पर लेता था। कुछ महीनों तक नियमित भुगतान करता, भरोसा जीतता और फिर कार का GPS निकलवाता और कार को औने-पौने दामों में बेच देता था।

आरोपी कि गिरफ्तारी के बाद कई पीड़ितों भी सामने आए। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने घर का खर्च चलाने के लिए लोन लेकर कार खरीदी थी, लेकिन कालरा ने उनकी पूरी जिंदगी की कमाई डकार ली।

अफसरों से नजदीकी, अपराध का कवच

आरोपी आईपीएस अधिकारियों के साथ उठता-बैठता था, उनकी तस्वीरें दिखाकर लोगों को डराता था और महंगे मोबाइल गिफ्ट कर अपनी पहुंच का प्रदर्शन करता था। यही झूठा रसूख उसकी ठगी की सबसे बड़ी ढाल था।

पुलिस मान रही है कि यह ठगी का नेटवर्क बहुत बड़ा है और आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल संजय कालरा पुलिस रिमांड पर है और उसकी संपत्तियों, कारों और संपर्कों की जांच जारी है। इंदौर की सड़कों पर चमकती लग्जरी कारों के पीछे छुपा यह काला सच अब पुलिस की गिरफ्त में