इंदौर दूषित पानी मामले में सरकार का एक्शन: 4 मौतों के बाद अफसर निलंबित, जांच समिति गठित
इंदौर में दूषित पेयजल से फैली बीमारी और चार लोगों की मौत के मामले में राज्य की मोहन सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत कार्रवाई की है। इस गंभीर मामले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरी है।
इंदौर: इंदौर में दूषित पानी पीने से फैली बीमारी और चार लोगों की मौत के मामले में राज्य की मोहन सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा एक्शन लिया है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आए इस गंभीर मामले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरी है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल एक्शन लिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिम्मेदार अफसर निलंबित, एक सेवा से पृथक
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि, जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है साथ ही प्रभारी उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव को भी सेवा से तत्काल पृथक किया है। यह कार्रवाई पेयजल आपूर्ति में गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद की गई है।
जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति
सरकार ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। यह समिति आईएएस नवजीवन पंवार के निर्देशन में जांच करेगी। समिति में प्रदीप निगम, सुप्रिडेंट इंजीनियर, डॉ. शैलेश राय, मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर को सदस्य बनाया गया है। समिति दूषित पानी की आपूर्ति के कारणों, लापरवाही की जिम्मेदारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर रिपोर्ट सौंपेगी।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, राहत कार्य जारी
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात कर दिया है। बीमार लोगों का इलाज जारी है। पेयजल की जांच कराई जा रही है। स्वच्छ पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश मरीजों की स्थिति स्थिर है, जबकि गंभीर मरीजों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
इस पूरे मामले में सरकार का संदेश साफ है कि जनस्वास्थ्य से जुड़ी लापरवाही पर अब सीधे कार्रवाई होगी। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
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