काला पानी, उड़ती राख, रायसेन की राइस मिल बनी मुसीबत
रायसेन के बाड़ी क्षेत्र में स्थित राइस मिल पर प्रदूषण फैलाने और किसानों की फसल बर्बाद करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतों और जांच के बावजूद हालात नहीं सुधरे रहे है।
रायसेन: बाड़ी तहसील के बाबई जोड़ क्षेत्र में स्थित स्टार वन (नर्मदा राइस मिल) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला केवल औद्योगिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की फसलों के नुकसान, ग्रामीणों की सेहत और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रदूषण के आरोप, खेतों को भारी नुकसान
ग्रामीणों का आरोप है कि राइस मिल से निकलने वाला काला और दुर्गंधयुक्त पानी खेतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। साथ ही मिल से उड़ने वाली भूसी और राख के कारण पूरे क्षेत्र में धूल और धुआं फैल रहा है, जिससे सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं और ग्रामीण सड़कों की स्थिति भी खराब हो रही है।पीड़ित किसान निलेश चौहान के मुताबिक, उनकी गेहूं की पूरी फसल खराब हो चुकी है और शिकायत करने पर उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच और नोटिस के बावजूद नहीं बदले हालात
मामले की शिकायतों के बाद Madhya Pradesh Pollution Control Board की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और सैंपल भी लिए। आवश्यक निर्देश और नोटिस जारी किए गए, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है और जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ।
पंचायत से लेकर जनपद तक मामला पहुंचा
नियमों के तहत पंचायत की अनुमति के बिना किसी औद्योगिक इकाई का संचालन अवैध माना जाता है। इसी आधार पर ग्राम पंचायत ने मिल प्रबंधन से वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद जनपद सीईओ ने संज्ञान लेते हुए मिल प्रबंधन को दोबारा नोटिस जारी किया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि समय सीमा में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो मामला जिला कलेक्टर को भेजा जाएगा।
स्कूल के बच्चों पर भी असर
राइस मिल के पास संचालित गुरुकुल पद्धति के एक स्कूल पर भी प्रदूषण का असर देखा जा रहा है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार बच्चों को मास्क लगाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है और वातावरण में फैली बदबू व धूल उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों को प्रभावित कर रही है।
कार्रवाई की दहलीज पर मामला, उठे बड़े सवाल
मामले में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जिसमें मिल को सील करने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में सख्त कार्रवाई होगी या फिर प्रभाव और दबाव के चलते मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
sanjay patidar 
