भोपाल: आयुर्वेद का बड़ा दावा, बिना ऑपरेशन 73% किडनी स्टोन से मरीजों को मिली राहत
भोपाल के पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय के शोध में दावा किया गया है कि आयुर्वेदिक काढ़े से 73% किडनी स्टोन मरीजों को बिना ऑपरेशन और लेजर इलाज के राहत मिली।
भोपाल:पं.खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय ने किडनी स्टोन (पथरी) के इलाज को लेकर बड़ा दावा किया है। महाविद्यालय द्वारा किए गए 90 दिन के शोध में सामने आया है कि आयुर्वेदिक काढ़े के नियमित सेवन से 73 फीसदी मरीजों को बिना ऑपरेशन और बिना लेजर इलाज के राहत मिली है। शोध के नतीजों के मुताबिक कई मरीजों में पथरी का आकार धीरे-धीरे कम हुआ, जबकि कुछ मामलों में पथरी पूरी तरह बाहर निकल गई।

यह शोध किडनी स्टोन से पीड़ित मरीजों पर किया गया, जिनमें लंबे समय से दर्द, जलन और पेशाब से जुड़ी समस्याएं थीं। शोध के दौरान मरीजों को विशेष आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार काढ़ा दिया गया और साथ ही खानपान, जीवनशैली और पानी पीने को लेकर जरूरी सलाह दी गई। उपचार के कुछ ही हफ्तों बाद मरीजों में दर्द में कमी देखी गई और पथरी से होने वाली परेशानी घटती चली गई।

बिना सर्जरी, बिना लेजर राहत का दावा
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह आयुर्वेदिक उपचार शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए काम करता है। काढ़ा मूत्र प्रणाली को साफ करता है, सूजन को कम करता है और पथरी को धीरे-धीरे तोड़ने में मदद करता है। इसके साथ ही पेशाब की मात्रा बढ़ाकर पथरी को शरीर से बाहर निकालने में सहायक होता है। इस पूरी प्रक्रिया में न तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है और न ही लेजर जैसी महंगी और जटिल तकनीक अपनानी पड़ती है।
दोबारा पथरी बनने का खतरा भी कम
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक इस इलाज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे पथरी के दोबारा बनने की संभावना भी कम होती है। इलाज के दौरान किडनी की कार्यक्षमता बनी रहती है और मरीजों को दर्द, खर्च और सर्जरी के डर से राहत मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एलोपैथिक इलाज में कई बार पथरी दोबारा बनने की शिकायत रहती है, जबकि आयुर्वेदिक पद्धति जड़ से समस्या पर काम करती है। डॉ रीता सिंह का कहना है कि आयुर्वेद में किडनी स्टोन को मूत्राश्मरी कहा गया है और इसका इलाज प्राचीन ग्रंथों में विस्तार से बताया गया है। यह शोध उन्हीं सिद्धांतों को आधुनिक तरीके से परखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सही परामर्श, नियमित उपचार और जीवनशैली में बदलाव के साथ मरीजों को इससे लंबे समय तक लाभ मिल सकता है।

इलाज के साथ परहेज भी जरूरी-डॉ रीता सिंह
डॉक्टर डॉ रीता सिंह का कहना है कि आयुर्वेदिक इलाज के साथ संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीना और गलत खानपान से बचना जरूरी है। ज्यादा नमक, जंक फूड और कम पानी पीने की आदत पथरी की समस्या को बढ़ा सकती है।कुल मिलाकर, पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय का यह शोध किडनी स्टोन के इलाज में आयुर्वेद को एक सुरक्षित, सस्ता और प्रभावी विकल्प के रूप में सामने रखता है। अगर यह दावा बड़े स्तर पर सफल होता है, तो लाखों मरीजों को ऑपरेशन और लेजर इलाज से राहत मिल सकती है।
sanjay patidar 
