अमेरिका-ईरान जंग खत्म! 19 जून को साइन हो सकती है पीस डील, फिर से खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर राजी: दोनों देशों ने सीजफायर के MoU को अंतिम रूप दिया, स्विट्जरलैंड के जेनेवा में पीस डील पर दस्तखत करेंगे
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने जंग खत्म करने और शांति समझौते (सीजफायर MoU) पर सहमति बना ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के साथ समझौता हो गया है और जल्द ही Strait of Hormuz को फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो। इसके साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी भी दे दी।
19 जून को जेनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सबसे पहले इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह करीब 47 वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच पहली उच्चस्तरीय औपचारिक बैठक होगी। शहबाज शरीफ ने कहा कि दोनों पक्षों ने न केवल एक-दूसरे के खिलाफ बल्कि क्षेत्र में चल रही अन्य सैन्य गतिविधियों को भी रोकने पर सहमति जताई है।
समझौते से पहले ईरान ने रखीं 3 अहम शर्तें
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन प्रमुख वादे पूरे करता है या नहीं।
ईरान की ओर से रखी गई 3 शर्तें—
- ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह समाप्त की जाए।
- सभी सैन्य कार्रवाइयों और युद्ध संबंधी गतिविधियों को रोका जाए।
- ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी किया जाए।
ईरान का कहना है कि इन कदमों के बाद ही आगे की वार्ता सफल हो सकेगी।
ईरान को 12 अरब डॉलर दे सकता है अमेरिका
ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तैयार किए गए 14 Bullet-point drafts में ईरान की जमी हुई संपत्तियों को Phases तरीके से जारी करने का प्रावधान है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका बातचीत शुरू होने से पहले 12 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियां जारी कर सकता है। इसके अलावा 60 दिन की वार्ता अवधि के दौरान कुल 24 अरब डॉलर की संपत्तियां मुक्त किए जाने की संभावना है। इन पैसों का इस्तेमाल ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और प्रतिबंधों के असर को कम करने के लिए कर सकता है।
इजराइल में समझौते का विरोध, लेबनान पर हमले की आलोचना
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते का इजराइल में विरोध शुरू हो गया है। इजराइल की डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख याइर गोलान ने इस समझौते को देश के लिए नुकसानदायक बताया है। गोलान का कहना है कि इजराइली सेना और वायुसेना ने हाल के वर्षों में जो सैन्य उपलब्धियां हासिल की थीं, यह समझौता उन्हें कमजोर कर देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ईरान को कमजोर करने के बजाय वह पहले से अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।
इधर, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में लेबनान की राजधानी बेरूत पर हुए इजराइली हमले की आलोचना भी की है। उनका कहना है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका था, उस समय इस तरह की सैन्य कार्रवाई से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई। ट्रंप के अनुसार इजराइली हमलों के कारण समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया कुछ समय के लिए टालनी पड़ी थी।
ईरान में भी विरोध, G7 समिट चर्चा संभव
हालांकि ईरान सरकार समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश के अंदर इसका विरोध भी तेज हो रहा है। कट्टरपंथी संगठनों, रूढ़िवादी नेताओं और सरकारी मीडिया के कुछ वर्गों का मानना है कि अमेरिका के साथ समझौता करना ईरान के लिए झुकने जैसा कदम होगा। विरोध करने वालों का कहना है कि युद्ध और प्रतिबंधों के दौरान ईरान ने जो रणनीतिक लाभ हासिल किए हैं, यह समझौता उन्हें कमजोर कर सकता है।
वहीं, फ्रांस में 15 से 17 जून तक होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भी अमेरिका-ईरान समझौते पर चर्चा होने की संभावना है। इस बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, कतर और मिस्र के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से दुनिया भर में तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है और ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।
Varsha Shrivastava 
