कूनो में 'प्रोजेक्ट चीता' को मिली नई रफ्तार, CM डॉ.मोहन यादव ने 2 मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क के बोत्सवाना से लाए गए 2 मादा चीतों को क्वॉरेंटाइन बाड़े से खुले जंगल में छोड़ा।

कूनो में 'प्रोजेक्ट चीता' को मिली नई रफ्तार, CM डॉ.मोहन यादव ने 2 मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना परियोजना को एक और बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को यहां क्वॉरेंटाइन और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी कर चुकी दो मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। ये दोनों चीते बोत्सवाना से भारत लाए गए चीतों के समूह का हिस्सा हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने चीतों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण देकर उन्हें अपने “परिवार का हिस्सा” बना लिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट केवल वन्यजीव संरक्षण नहीं, बल्कि भारत की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

बोत्सवाना से लाए गए चीतों का सफल पुनर्वास

हाल ही में अफ्रीकी देश बोत्सवाना से कुल 9 चीते भारत लाए गए थे, जिनमें 5 मादा और 4 नर शामिल थे। भारत पहुंचने के बाद इन सभी चीतों को कूनो नेशनल पार्क के क्वॉरेंटाइन बाड़ों में रखा गया था। लगभग एक महीने तक उनकी स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी की गई।

इसके बाद सभी चीतों को सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में स्थानांतरित किया गया। यहां उन्हें प्राकृतिक वातावरण के अनुसार ढलने का समय दिया गया। इसी प्रक्रिया के बाद दो मादा चीतों को सोमवार को खुले जंगल में छोड़ दिया गया। बाकी सात चीते अभी भी निगरानी में हैं और उन्हें चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ा जाएगा।

कूनो नदी किनारे किया गया चीता रिलीज

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो नदी के किनारे स्थित रिलीज साइट पर दोनों चीतों को जंगल में छोड़ा। जैसे ही बाड़ा खोला गया, दोनों चीते तेजी से जंगल की ओर दौड़ पड़े। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उत्साहित नजर आए। बता दें, मुख्यमंत्री स्वयं रविवार शाम कूनो पहुंचे थे और उन्होंने रात्रि विश्राम भी वहीं किया। अगले दिन सुबह उन्होंने रिलीज प्रक्रिया में हिस्सा लिया और पूरी गतिविधि की निगरानी की।

मुख्यमंत्री बोले– मध्यप्रदेश बना ‘चीता स्टेट’

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले शुरू किया गया Project Cheetah अब सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ने नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्वास में सफलता हासिल की है। आज मध्यप्रदेश की पहचान “चीता स्टेट” के रूप में बन रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 57 चीते हैं। इनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभयारण्य में मौजूद हैं।

वन विभाग की निगरानी में चल रहा पूरा प्रोजेक्ट

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी नियमित निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों की टीम उनके व्यवहार, स्वास्थ्य और जंगल में अनुकूलन पर नजर रख रही है। अधिकारियों ने बताया कि शेष चीतों को भी चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी सुरक्षा और वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है ताकि चीतों को प्राकृतिक वातावरण में सहज रूप से बसाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश और जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि चीता प्रोजेक्ट न केवल वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह राज्य के पर्यटन को भी नई दिशा दे रहा है। कूनो नेशनल पार्क में चीते आने के बाद यहां पर्यटकों की रुचि बढ़ी है। देश और विदेश से लोग इस दुर्लभ वन्यजीव को देखने के लिए कूनो पहुंच रहे हैं।

कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

चीता विमुक्ति कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष गुड्डी बाई आदिवासी सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल थे।

इसके अलावा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जैसे पीसीसीएफ समिता राजौरा, डीआईजी संजय कुमार जैन, कलेक्टर शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल और डीएफओ कुनो आर थिरूकुराल भी उपस्थित रहे।

सरकार का कहना है कि चीता पुनर्स्थापन परियोजना को आगे भी विस्तार दिया जाएगा। आने वाले समय में और भी चीतों को जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि एक स्थायी और संतुलित चीता आबादी विकसित हो सके। वन विभाग का लक्ष्य है कि कूनो नेशनल पार्क में चीते प्राकृतिक रूप से प्रजनन करें और एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो।