सीधी के गोपाल दास मंदिर में 108 वर्षों तक गूंजेगा 'सीताराम' का जाप, दीवारों पर अंकित है पूरी रामायण
मध्य प्रदेश के सीधी स्थित गोपाल दास मंदिर में 108 वर्षों तक सीताराम का अखंड जाप जारी रहेगा। मंदिर की दीवारों पर पूरी रामायण लिखी गई है और यहां साधु-संत भक्ति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
रिपोर्ट: दीपक मिश्रा, सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित गोपाल दास मंदिर अपनी आध्यात्मिक परंपरा और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मंदिर में गोपाल दास महाराज द्वारा शुरू कराया गया 'सीताराम' नाम का अखंड जाप लगातार 108 सालों तक रखने का संकल्प लिया गया है. वर्तमान में यहां साधु-संत लगातार सीताराम का जाप कर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.
मंदिर में मौजूद साधु-संतों से बातचीत के दौरान कई रोचक जानकारियां सामने आईं. उन्होंने बताया कि यह केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी आश्रय है, जिनके पास जीवन में कोई सहारा नहीं बचा. कुछ साधु अपनी इच्छा से वैराग्य का मार्ग अपनाकर यहां सेवा और भक्ति में लगे हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें परिवार का साथ नहीं मिला या माता-पिता के निधन के बाद मंदिर ही उनका घर बन गया.
मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में इसकी दीवारों पर लिखी गई संपूर्ण रामायण शामिल है. श्रद्धालु मंदिर परिसर में घूमते हुए रामायण के प्रसंगों का अध्ययन भी कर सकते हैं. इसके अलावा मंदिर का शांत वातावरण, नियमित भजन-कीर्तन और अखंड नाम-स्मरण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं. साधु-संतों का कहना है कि उनके लिए भगवान श्रीराम का नाम ही जीवन का आधार है. वे दिन-रात 'सीताराम' का जाप करते हुए अपनी दिनचर्या बिताते हैं और इसे मानव जीवन के कल्याण का सबसे सरल मार्ग मानते हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार गोपाल दास मंदिर वर्षों से धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर की अनूठी परंपराओं को जानने में रुचि दिखाते हैं.

