BJP के चार विधायकों पर भारी TI
कटनी जिले के चारों विधायक—संदीप जायसवाल, संजय पाठक, प्रणय पांडे और अभिलाष पांडे—पहली बार एक साथ विधानसभा में खड़े हुए और माधवनगर थाना प्रभारी सहित पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कटनी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे जिले के प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चारों विधायक—संदीप जायसवाल, संजय पाठक, प्रणय पांडे और अभिलाष पांडे—पहली बार एक साथ विधानसभा में खड़े हुए और माधवनगर थाना प्रभारी व पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। विधायकों ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से बताया कि पुलिस ने एक साधारण घटना को बड़ा बनाकर शुभम त्रिपाठी को गलत धाराओं में फंसा दिया और पूरे मामले में मिलीभगत की गई।
पहले जानें पूरा क्या था मामला?
कटनी के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 26–27 अगस्त की रात आर्म्स डीलर नाजिम खान के घर की बाउंड्रीवाल पर लगी नेम प्लेट में किसी ने आग लगा दी। यह आग मात्र 20 सेकेंड में बुझ गई और न तो किसी व्यक्ति को चोट पहुंची और न ही घर को कोई नुकसान हुआ। घर और बाउंड्रीवाल के बीच लगभग 15 फुट की दूरी थी, इसलिए घटना गंभीर नहीं थी।
लेकिन शिकायत के बाद पुलिस ने शुभम त्रिपाठी पर घर जलाने और परिजनों को नुकसान पहुंचाने की गंभीर धाराएं लगा दीं, जिनमें BNS की धारा 326(G) जैसी गैरजमानती धारा भी शामिल है। इस धारा की वजह से शुभम को जेल भेजा गया और पुलिस ने इसे बड़ा अपराध मानकर तुरंत कार्रवाई की।

विधायकों का पुलिस पर गंभीर आरोप
चारों विधायकों ने विधानसभा में बताया कि पुलिस ने न तो कोई ठोस सबूत जुटाए और न ही वास्तविक जांच की। उनके अनुसार मामले में नाजिम खान और पुलिस की मिलीभगत दिखती है। उन्होंने कहा कि शुभम त्रिपाठी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, फिर भी पुलिस ने जानबूझकर कठोर धारा लगाकर उसे जेल भेजा।

विधायकों ने यह भी बताया कि जिस घटना में किसी प्रकार की हानि नहीं हुई, उसे जानबूझकर बड़ा बनाया गया और राजनीतिक दबाव में आकर शुभम व उसके परिवार को परेशान किया गया।
सबसे गंभीर आरोप: थाने में अवैध पूछताछ
ध्यानाकर्षण में यह भी खुलासा हुआ कि पुलिस रिमांड के दौरान कांग्रेस नेता नाजिम खान और युवक कांग्रेस अध्यक्ष दिव्यांशु मिश्रा थाने पहुंच गए।
आरोप है कि टीआई की मौजूदगी में दोनों ने थाने के अंदर बैठकर शुभम त्रिपाठी से पूछताछ की और उस पर दबाव बनाया कि वह कटनी के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और उनके परिवार का नाम ले। उनसे कहा गया कि अगर वे बताए हुए नामों को शामिल करते हैं, तो उन्हें बचा लिया जाएगा, नहीं तो जेल में ही रहना पड़ेगा।
यह आरोप पुलिस की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है, क्योंकि थाने के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा पूछताछ करना नियमों के खिलाफ है।
ब्राह्मण समाज भी उतरा मैदान में
शुभम त्रिपाठी की गिरफ्तारी और परिवार को परेशान किए जाने के बाद ब्राह्मण समाज के लोग बड़ी संख्या में सामने आए और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। समाज ने कहा कि पुलिस द्वारा लगातार गलत तरीके से कार्रवाई की जा रही है।
विधायक संजय पाठक ने कहा कि जब घर जलाने का प्रयास नहीं हुआ, घर के लोगों को जिंदा जलाने का प्रयास नहीं हुआ। घर से 15 फीट बाहर बाऊंड्रीवाल के नेम प्लेट पर आगजनी की घटना हुई है। गलत धाराएं लगाकर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है, बिना किसी सबूत और गवाह के।
सरकार ने दिए दोबारा जांच के निर्देश
विधानसभा में उठाए गए सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि पूरे मामले की दोबारा जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सीसीटीवी फुटेज समेत सभी तथ्य फिर से देखे जाएंगे और अगर जांच में किसी भी अधिकारी या व्यक्ति की लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि विधायकों द्वारा दिए गए लिखित बिंदुओं पर आधारित विस्तृत जांच कराई जाएगी।
Varsha Shrivastava 
