भोपाल में राष्ट्रीय ज्योतिष महा सम्मेलन: विद्वतापूर्ण चर्चाओं और विचार-विमर्श के नाम रहा दूसरा दिन, AI पर भी हुआ गहन मंथन

भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष महा सम्मेलन का आयोजन, दूसरा दिन विद्वतापूर्ण चर्चाओं और विचार-विमर्श के नाम रहा, AI पर गहन मंथन हुआ।

भोपाल में राष्ट्रीय ज्योतिष महा सम्मेलन: विद्वतापूर्ण चर्चाओं और विचार-विमर्श के नाम रहा दूसरा दिन, AI पर भी हुआ गहन मंथन
Jyotish Sammelan Bhopal

भोपाल: राजा भोज की नगरी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष महा सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन विद्वतापूर्ण चर्चाओं और विचार-विमर्श के नाम रहा। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वाधान में आयोजित इस सम्मेलन में 2 दिन में कुल 6 सत्र आयोजित किए गए हैं। शासकीय रामानंद संस्कृत महाविद्यालय, गुफा मंदिर लालघाटी में चल रहे इस सम्मेलन में देशभर से आए ज्योतिषाचार्यों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने पंचांग ज्योतिष की एकरूपता, ज्योतिष एवं नवीन शिक्षा नीति, ज्योतिष का जनमानस पर प्रभाव, पंचपक्षी ज्योतिष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

दूसरे दिन पंचांग की एकरूपता और AI पर हुआ मंथन

दूसरे दिन के सत्रों में पंचांग की एकरूपता को लेकर विशेष चर्चा हुई, जिसमें विद्वानों ने पर्व-त्योहारों और व्रत निर्धारण में व्याप्त भिन्नताओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। ज्योतिष एवं नवीन शिक्षा नीति विषय पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि ज्योतिष केवल भविष्य कथन नहीं, बल्कि गणित, खगोल और दर्शन से जुड़ा एक वैज्ञानिक विषय है, जिसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली में समुचित स्थान मिलना चाहिए।

सम्मेलन में ज्योतिष का जनमानस पर प्रभाव विषय पर भी व्यापक मंथन हुआ। वक्ताओं ने बताया कि आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में ज्योतिष पर विश्वास करता है, ऐसे में इसकी जिम्मेदारी और प्रामाणिकता और अधिक बढ़ जाती है। पंचपक्षी ज्योतिष एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आयोजित सत्र सम्मेलन का विशेष आकर्षण रहा। इसमें वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक और एआई के माध्यम से ज्योतिषीय गणनाओं को अधिक सटीक, सरल और जनोपयोगी बनाया जा सकता है। यह सत्र विद्यार्थियों और युवाओं के बीच विशेष रूप से चर्चित रहा।

सम्मेलन में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वान और शोधार्थी सहभागिता कर रहे हैं। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे साथ ही चयनित शोध पत्रों का प्रकाशन महाविद्यालय की स्मारिका में किया जाएगा। दो दिवसीय यह राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में पहली बार ज्योतिष विषय पर इतने व्यापक स्तर पर आयोजित हुआ है, जिसे विद्वानों ने भारतीय ज्योतिष परंपरा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया। शोधकर्ताओं को सुनने के लिए ज्योतिष में रुचि रखने वाले छात्र भी पहुंचे हैं। इस दौरान सभी बच्चों को विद्वानों के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।