रीवा SGMH मामला: 9 डॉक्टरों पर कोर्ट का शिकंजा, मारपीट और साक्ष्य मिटाने के आरोप
रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) मामले में 9 डॉक्टरों पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मारपीट, दुर्व्यवहार और CCTV साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर सुनवाई जारी.
रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए 9 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं. मामले में मरीजों के अधिकारों के कथित हनन, दुर्व्यवहार, मारपीट और साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.
रीवा न्यायालय में 30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के दौरान डॉ. निधि पांडेय, डॉ. सिद्धार्थ जैन और डॉ. आशीष प्रताप सिंह स्वयं उपस्थित हुए, जबकि अन्य आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने मेमो ऑफ अपीयरेंस दाखिल किया. इससे पहले 13 फरवरी 2026 को सभी 9 आरोपितों को नोटिस जारी किया गया था.
ऑपरेशन से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत 24 जुलाई 2024 को हुई, जब RTI एक्टिविस्ट डॉ. विवेक पांडे की माता का गॉल ब्लैडर ऑपरेशन SGMH में निर्धारित था. ऑपरेशन थिएटर में नेल पॉलिश को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद एनेस्थीसिया विभाग की एक डॉक्टर पर मरीज से अभद्र व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगे.
परिवाद के अनुसार, बाद में स्थिति और बिगड़ गई और आरोप है कि 15–20 डॉक्टरों एवं स्टाफ ने मिलकर डॉ. विवेक पांडे के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की तथा उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया गया.
जांच समिति पर भी सवाल
मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा गठित 5 सदस्यीय जांच समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जांच एकतरफा रही और आरोपितों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कोर्ट में पहुंचा मामला
कार्रवाई न होने पर नवंबर 2025 में रीवा न्यायालय में परिवाद दायर किया गया, जिसमें डीन और जांच समिति के सदस्यों सहित कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया।
मामले में अधिवक्ता आनंद मोहन मिश्रा पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में जवाबदेही तय करने का मुद्दा है.
shivendra 
