18 माह की आंशी को मिला सुनने-बोलने का उपहार, 6.50 लाख की सर्जरी होगी निःशुल्क  

AIIMS भोपाल में होगा ऑपरेशन, RBSK योजना बनी जीवनदायिनी

18 माह की आंशी को मिला सुनने-बोलने का उपहार, 6.50 लाख की सर्जरी होगी निःशुल्क  

मऊगंज से रिपोर्टर राजेंद्र पयासी। 

जिले के हनुमना ब्लॉक के छोटे से गांव भोड़हा में रहने वाले अजय पटेल के घर 18 महीने बाद पहली बार किलकारी गूंजेगी। उनकी बेटी आंशी, जो जन्म से सुन नहीं सकती थी, अब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद से सुन और बोल पाएगी।

कलेक्टर संजय जैन के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर पी के पांडेय ने आंशी के माता-पिता को 6.50 लाख रुपये की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का स्वीकृति आदेश सौंपा। यह पूरा इलाज मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना के तहत निःशुल्क होगा।

बिटिया की खामोशी कैसे टूटी
 
25 जनवरी 2024 को जन्मी आंशी जन्म से ही सुन नहीं पाती थी। बोलने की उम्र में भी जब वह कोई आवाज नहीं कर पाई, तो परेशान परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हनुमना लेकर पहुंचे। RBSK AMO डॉ. विवेक त्रिपाठी ने जांच के बाद तुरंत उसे जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र, जिला अस्पताल रीवा रेफर कर दिया।

DEIC मैनेजर विष्णु प्रताप सिंह ने बताया, बच्ची का तत्काल पंजीयन कर ऑडियोलॉजी जांच कराई गई। रिपोर्ट में दोनों कानों से सुनने में अक्षम पाया गया। इसके बाद राष्ट्रीय बधिरता नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. हेमंत अग्रवाल ने आंशी को AIIMS भोपाल भेजा।

AIIMS भोपाल के विशेषज्ञों ने जांच के बाद कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी जरूरी बताई। इस सर्जरी में कान के अंदर मशीन लगाई जाती है जो ध्वनि को मस्तिष्क तक पहुंचाती है। सर्जरी का कुल खर्च 6.50 लाख रुपये आया, जिसकी स्वीकृति CMHO कार्यालय रीवा से जारी की गई।

सर्जरी के बाद भी जारी रहेगा इलाज
  
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यतनेश त्रिपाठी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद कहानी खत्म नहीं होगी। सर्जरी के बाद बच्ची को एक साल तक AIIMS भोपाल में ही फॉलो-अप और स्पीच थेरेपी दी जाएगी। तभी वह सामान्य बच्चों की तरह सुन-बोल सकेगी। डॉ. त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री बाल श्रवण उपचार योजना RBSK का ही हिस्सा है। इसमें जन्मजात बहरेपन से ग्रसित 0 से 2 वर्ष तक के बच्चों का निःशुल्क इलाज होता है। विशेष परिस्थितियों में यह लाभ 5 वर्ष तक के बच्चों को भी दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार जेनेटिक डिसऑर्डर, गर्भावस्था के पहले तीन महीने में रूबेला संक्रमण, अधिक एंटीबायोटिक का उपयोग, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, पीलिया, कम या ज्यादा वजन और कान का संक्रमण बच्चों में बहरेपन की मुख्य वजह हैं। DPM राघवेंद्र मिश्रा ने कहा, RBSK अब तक सैकड़ों बच्चों की जिंदगी बदल चुका है। जन्मजात हृदय रोग, कटे होंठ-तालु और बहरेपन जैसी 30 बीमारियों का निःशुल्क इलाज इस योजना में होता है।

आंशी की मां की आंखें भर आईं

स्वीकृति आदेश हाथ में लेते ही आंशी की मां की आंखें भर आईं। पिता अजय पटेल ने कहा कि मजदूरी और सामान्य खेती किसानी करके 6 लाख का इंतजाम करना हमारे लिए नामुमकिन था। हमें लगा था बिटिया जिंदगीभर गूंगी-बहरी रहेगी। कलेक्टर साहब और सरकार का यह उपकार हम कभी नहीं भूलेंगे। जिले में यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।