रीवा में बेलगाम आवारा मवेशियों से जनजीवन बेहाल, प्रशासन मौन

रीवा शहर, जो स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इन दिनों आवारा मवेशियों की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और बाजारों में सड़कों पर घूमते या बैठे मवेशी लोगों के लिए जान का खतरा बन चुके हैं।

रीवा में बेलगाम आवारा मवेशियों से जनजीवन बेहाल, प्रशासन मौन

रीवा। स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में अग्रसर रीवा शहर इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है, आवारा मवेशियों की बेलगाम बढ़ती संख्या, जो न केवल आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि सड़कों पर जानलेवा हादसों की वजह भी बनती जा रही है।

शहर के मुख्य मार्गों, बाजारों, और चौराहों पर बैठे मवेशी अब स्थानीय लोगों के लिए भय और असुरक्षा का कारण बन चुके हैं। शहर में आए दिन होने वाले सड़क हादसों की बड़ी वजह अब ट्रैफिक नहीं, बल्कि ये आवारा मवेशी बनते जा रहे हैं।

खासतौर पर रात के समय, जब हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों पर अंधेरा रहता है, वाहन चालकों को सड़कों पर बैठे मवेशी नजर नहीं आते। परिणामस्वरूप कई बार वाहन इन मवेशियों से टकरा जाते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। पिछले कुछ महीनों में दर्जनों गंभीर हादसे इसी वजह से हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की जान भी चली गई।

बीते वर्षों में प्रशासन ने मवेशी मालिकों पर कार्रवाई करने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन ये निर्देश जमीन पर कभी सख्ती से लागू नहीं हो सके। नगर निगम द्वारा समय-समय पर मवेशियों को पकड़ने की कवायद जरूर की जाती है, लेकिन वह नाममात्र की कार्रवाई बनकर रह जाती है। नतीजा ये है कि समस्या जस की तस बनी हुई है।

प्रमुख स्थान जहां सबसे अधिक दिखते हैं मवेशी

शहर के सब्जी मंडी, फोर्ट रोड, नया बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड, जय स्तंभ चौक, प्रकाश चौराहा, घोबिया टंकी, सिरमौर चौराहा और जिला अस्पताल के आसपास मवेशियों का जमावड़ा आम हो चुका है। इन इलाकों में मवेशियों के कारण ट्रैफिक जाम, पार्क किए गए वाहनों की क्षति, और राहगीरों की परेशानी रोज की कहानी बन चुकी है।

आपस में भिड़ते मवेशी, राहगीरों पर खतरा

इन मवेशियों के आपसी संघर्ष की घटनाएं भी अब आम हो चुकी हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बैलों की लड़ाई कई बार आम नागरिकों के लिए खतरा बन जाती है। राह चलते लोगों को मवेशियों की टक्कर या लात लगने से गंभीर चोटें तक आ चुकी हैं।

जनता में नाराजगी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से इस मुद्दे पर शिकायत की, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं, लेकिन कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।