मऊगंज: बहुती जंगल में भीषण आग, करोड़ों की वन संपदा खाक, वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे 198 मीटर के बहुती जलप्रपात की पहचान पर अब ग्रहण लगता दिख रहा है। जिसका कारण है जलप्रपात के चारों ओर फैले सैकड़ों हेक्टेयर के घने जंगल में लगी भीषण आग और उस पर वन विकास निगम की शर्मनाक चुप्पी। सोमवार से धधक रहा जंगल लगातार सुलग रहा है, लेकिन धधकती आग को बुझाना तो दूर, वन विकास निगम का एक भी बीट गार्ड तक सुध लेने नहीं पहुंचा।

मऊगंज: बहुती जंगल में भीषण आग, करोड़ों की वन संपदा खाक, वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
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रिपोर्टर- राजेंद्र पयासी, मऊगंज

बहुती का जंगल सिर्फ पेड़ नहीं, 'हरा सोना' है। शुरुआती आंकलन में ही नुकसान करोड़ों में पहुंच चुका है। पूरे क्षेत्र में बांस की प्राकृतिक घनी झाड़ियां थीं, साथ ही तेंदूपत्ता के हजारों पेड़ जल गए। बहुती के जंगल आयुर्वेद का खजाना माने जाते हैं। अर्जुन, कालमेघ, हर्रा, बहेरा जैसे दुर्लभ औषधीय पौधे आग की भेंट चढ़ गए। जंगल में आग लगने से चीतल, जंगली सूअर, मोर, भालू का प्राकृतिक रहवास उजड़ गया। कई छोटे जीव-जंतु जिंदा जल गए होंगे। बहुती जंगल में आग लगने से जितने पेड़-पौधों को नुकसान हुआ, उतनी वन संपदा तैयार करने में दो दशक लगेंगे।

नाकामी की इंतहा: 4 लेयर का सिस्टम फेल

बहुती जंगल में लगी भीषण आग ने वन विकास निगम के पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। जंगल धू-धू कर जल रहा है, लेकिन बीट गार्ड, डिप्टी रेंजर, रेंजर एवं डीएफओ को वन क्षेत्र के वर्तमान हालात के बारे में जानकारी ही नहीं है। नियमानुसार हर बीट में फायर वॉचर तैनात होने चाहिए। गर्मी में फायर सीजन के लिए एक्स्ट्रा स्टाफ रखा जाता है। बहुती जंगल में आग लगी है लेकिन वन विकास निगम का एक भी कर्मचारी मौके पर नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि वन विकास निगम के कर्मचारी-अधिकारी जंगल की सुरक्षा पर ध्यान देते तो शायद वन संपदा को इतना नुकसान नहीं होता।

सीधी से चल रहा खेल, फायर लाइन और संसाधन सिर्फ कागजों में

हर साल गर्मी के मौसम में आगजनी से जंगल की सुरक्षा हेतु उपकरणों की खरीद के नाम पर खर्च होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था नदारद है। वन विकास निगम के रेंजर से लेकर डीएफओ तक का दफ्तर सीधी में है। मऊगंज में तैनात एसडीओ भी कभी-कभार ही आते हैं। नतीजा, जंगल की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है।

इन्होंने कहा

"बहुती जंगल में आग लगने की जानकारी नहीं मिल पाई थी। अभी-अभी जानकारी संज्ञान में लाई गई है, अति शीघ्र कर्मचारियों को भेजकर आग बुझाने का प्रयास किया जाएगा।"

रघुनंदन सोनवंशी
रेंजर, वन विकास निगम मऊगंज