जियो का IPO जल्द, 27 करोड़ शेयर होंगे जारी सेबी के पास दस्तावेज जमा

जियो का IPO जल्द, 27 करोड़ शेयर होंगे जारी सेबी के पास दस्तावेज जमा मुकेश अंबानी बोले- आकाश, ईशा और अनंत संभालेंगे जिम्मेदारी

जियो का IPO जल्द, 27 करोड़ शेयर होंगे जारी सेबी के पास दस्तावेज जमा

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो के आईपीओ के लिए आज 19 जून को सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए। कंपनी की 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इसकी जानकारी दी। आईपीओ के जरिए कंपनी 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। शेयरों की कीमत कितनी होगी अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पूरी प्रोसेस सेबी के नियमों के मुताबिक होगी।

ड्राफ्ट पेपर्स एक कच्चा डॉक्यूमेंट होता है जो कंपनी मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एक्चेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी को जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस, प्रमोटर्स और वित्तीय सेहत की पूरी जानकारी होती है। सेबी की मंजूरी के बाद ही IPO बाजार में आता है। जियो प्लेटफॉर्म के एमडी आकाश अंबानी हैं। उन्होंने इस एजीएम में जियो के फ्यूचर प्लान की जानकारी दी।

पेपर्स फाइल, 2-3 महीने में आ सकता है IPO

नियमों के मुताबिक, सेबी को इन पेपर्स की जांच करने और हरी झंडी देने में करीब 2 से 3 महीने का समय लगेगा। अगर बाजार के हालात ठीक रहे और सेबी से मंजूरी समय पर मिल गई, तो एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह आईपीओ इस साल के (नवंबर-दिसंबर) तक या अगले साल की शुरुआत में बाजार में आ सकता है।

रिलायंस की टेक कंपनी है जियो प्लेटफॉर्म्स

जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस की ही एक टेक कंपनी है, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई में है। भारत में अपना खुद का सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क चलाने के साथ-साथ यह कंपनी दुनिया की दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी एडवांस 5G सर्विस और तकनीक देने का काम करती है। इसके पास 5G से जुड़े सभी जरूरी सॉफ्टवेयर, नेटवर्क सर्विसेज और एआई (AI) टूल्स मौजूद हैं। इस तकनीक की मदद से बड़ी कंपनियों और प्राइवेट नेटवर्क्स के लिए 5G का इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है, जिसे इंटरनेट क्लाउड पर भी चलाया जा सकता है।

 रिलायंस इंटेलिजेंस जामनगर में खुद का AI बैकबोन तैयार कर रहा है, जिसका 120 मेगावाट का पहला फेज 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी अपने AI इन्फ्रास्ट्रक्चर को ताकत देने के लिए एनवीडिया GB300 जीपीयू का इस्तेमाल शुरू कर रही है। जियो भारतीय भाषाओं में एआई बना रहा है, ताकि देश भर के लोगों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना आसान और फायदेमंद हो सके। हम जो बना रहे हैं वो भारत के लिए एआई है, भारत द्वारा बनाया गया एआई है और एक दिन यह पूरी दुनिया के काम आएगा। हमारा लक्ष्य इस दशक के अंत तक एआई को हर किसी के बजट में लाना है। जियो भारतीय भाषाओं में एआई बना रहा है, ताकि देश भर के लोगों के लिए इसका इस्तेमाल करना आसान और फायदेमंद हो सके।

रिलायंस ने 'जियो टेलीफ्रेम' पेश किया है, यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसे AI एजेंट्स के लिए डिज़ाइन किया गया है। वहीं जियो होम्स अगली पीढ़ी की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देगा, जिसमें हर घर को 5 Gbps डाउनलोड और 1 Gbps अपलोड तक की स्पीड मिलेगी।

जियो का यूजर बेस 52.4 करोड़ सब्सक्राइबर्स को पार कर गया है, जिसने भारत के सबसे बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत किया है। वहीं 1.3 करोड़ से ज्यादा घर जियो एयरफाइबर से जुड़ चुके हैं। चीन के बाहर किसी भी एक देश में काम करने वाले टेलीकॉम ऑपरेटर का सबसे बड़ा 5G यूजर बेस बन गया है।

AI वॉइस असिस्टेंट लॉन्च करेगा जियो

जियो 'जियो कॉल एजेंट' लेकर आ रहा है। यह एक AI वॉइस असिस्टेंट है जो सीधे जियो नेटवर्क में ही जुड़ा होगा, इसके लिए कोई एप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सर्विस हर जियो यूजर के लिए उपलब्ध होगी और यह सभी भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेगी। यूजर्स सिर्फ "हे जियो" बोलकर इस एआई असिस्टेंट को चालू कर सकेंगे, जिसके बाद यह कॉल में शामिल होकर यूजर की मदद कर सकेगा। यह एआई एजेंट लाइव कॉल के दौरान बातचीत को लिख सकता है और कॉन्फ्रेंस कॉल में 10 अलग-अलग लोगों की आवाज पहचान सकता है।

यह कॉल समरी, वर्क लिस्ट और रिमाइंडर भी तैयार कर सकता है, जिसे कॉल खत्म होने के बाद शेयर किया जा सकेगा। यह एआई असिस्टेंट लाइव कॉल के दौरान ही कई काम कर सकता है, जैसे खाना ऑर्डर करना, कैब बुक करना, टेबल रिजर्व करना और मीटिंग शेड्यूल करना। जियो कॉल एजेंट को वॉइस कॉल के अंदर मिलने वाले एक पर्सनल एआई कॉन्शिएर्ज (मददगार) के रूप में तैयार किया गया है। उम्मीद है कि इसे इस साल के आखिर तक जियो के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स के लिए लॉन्च कर दिया जाएगा।