कलेक्टर बदलते ही बैरसिया में अवैध खनन का खेल फिर बेलगाम, धरती का सीना छलनी कर रहे खनन माफिया
तरुण सिंह ठाकुर और सोनू सिसोदिया के संरक्षण में अवैध खनन का कारोबार फल-फूल रहा। एक ही रॉयल्टी पर्ची के सहारे कई-कई वाहनों से खनिज सामग्री का परिवहन किया जा रहा।
बैरसिया। बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन का खेल एक बार फिर पूरे शबाब पर दिखाई दे रहा है। रात के अंधेरे में खदानों से निकल रहे वाहनों की आवाजाही और लगातार मिल रही शिकायतों ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह थे उस समय इन खनन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई भी हुई थी। लेकिन कलेक्टर के बदलते ही ये फिर से सक्रिय हो गए और रात के अंधेरे में ही अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं।

तरुण सिंह-सोनू सिसोदिया के संरक्षण में चल रहा अवैध खनन
क्षेत्र में तरुण सिंह उर्फ बिट्टू ठाकुर और सोनू सिसोदिया के संरक्षण में अवैध खनन का कारोबार फल-फूल रहा है। कहा जा रहा है कि, प्रशासन की सख्ती कम होते ही अवैध उत्खनन करने वाले तत्व फिर से सक्रिय हो गए हैं। और नियम-कायदों को खुली चुनौती दे रहे हैं।

सोनू सिसोदिया और तरुण सिंह ठाकुर
कौशलेंद्र विक्रम सिंह के कार्यकाल में अवैध खनन के खिलाफ चलाए गए अभियानों से खनन कारोबारियों में खौफ था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौटते नजर आ रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप रॉयल्टी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगाए जा रहे हैं।
एक ही रॉयल्टी पर्ची के सहारे कई वाहनों से खनिज सामग्री का परिवहन
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक ही रॉयल्टी पर्ची के सहारे कई-कई वाहनों से खनिज सामग्री का परिवहन किया जाता है। इतना ही नहीं, कई बार बिना वैध दस्तावेजों के भी वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। जिससे न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लग रही है। बल्कि बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है।

बैरसिया क्षेत्र में संचालित कई खदानों की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्धारित मानकों और नियमों की अनदेखी कर उत्खनन किया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। यही वजह है कि अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है।

अब सवाल यह है कि आखिर खनिज विभाग, पुलिस और वन विभाग कब तक शिकायतों को नजरअंदाज करते रहेंगे? क्या बैरसिया में अवैध खनन के इस कथित खेल पर लगाम लगाने के लिए कोई बड़ा अभियान चलेगा या फिर धरती का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा? क्षेत्रवासियों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
Varsha Shrivastava 
