दिल्ली की सड़कों पर फिर दिखेंगे ‘कॉकरोच’, CJP का 5 सितंबर को बड़ा मार्च

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने और न्याय की मांग को लेकर फिर सड़क पर उतरेंगे युवा

दिल्ली की सड़कों पर फिर दिखेंगे ‘कॉकरोच’, CJP का 5 सितंबर को बड़ा मार्च
 देशभर में छात्र और युवा आंदोलनों के बीच चर्चा में आई CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली में बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद फैसला लिया गया कि 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला जाएगा। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा।
 
CJP का कहना है कि सरकार ने पिछले आंदोलन के दौरान युवाओं और प्रदर्शनकारियों को जो आश्वासन दिए थे, उनका पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। संगठन ने इसे युवाओं के साथ “वादाखिलाफी” और “विश्वासघात” बताया है।

आखिर क्यों हो रहा है नया आंदोलन?
 
CJP ने जुलाई में दिल्ली में हुए छात्र-युवा आंदोलन के दौरान NEET पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए थे। उस दौरान सरकार के साथ बातचीत और कुछ आश्वासनों के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया था।
 
लेकिन CJP का आरोप है कि आंदोलन खत्म होने के बाद भी कई अहम मुद्दे अधूरे हैं। सबसे बड़ा विवाद उन FIR को लेकर है, जो आंदोलन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थीं। संगठन का कहना है कि इन्हें वापस लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक सभी मामलों में कार्रवाई नहीं हुई है।

 
CJP का आरोप है कि सरकार समय निकालने की कोशिश कर रही है और आंदोलन से जुड़े लोगों को अब भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से संगठन ने दोबारा दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन का फैसला लिया है।
CJP की मुख्य मांगें क्या हैं?

 
नए आंदोलन में सबसे प्रमुख मुद्दा प्रदर्शनकारियों और छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना है। इसके साथ ही CJP उन लोगों को न्याय दिलाने की मांग भी उठा रही है, जिन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई और हिंसा का सामना किया।
 
आंदोलन से पहले CJP की प्रमुख मांगों में ये मुद्दे शामिल रहे हैं—
CJP की पुरानी तीन प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा और सोनम वांगचुक की रिहाई का मुद्दा भी शामिल रहा था।
 
25 जुलाई के बाद फिर क्यों गरमाया मामला?
 
25 जुलाई को सरकार से बातचीत और आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था। CJP का दावा है कि आंदोलन खत्म करने का फैसला सरकार की प्रतिबद्धताओं पर भरोसा करके लिया गया था। अब संगठन का कहना है कि यदि उन वादों को पूरा नहीं किया जाता तो यह युवाओं के भरोसे के साथ धोखा होगा।
 
24 अगस्त को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इन वादों की समीक्षा के बाद दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया गया। CJP ने छात्रों और युवाओं से अगले चरण के लिए तैयार रहने की अपील की है।
 
पीड़ित परिवार और युवा बनेंगे आंदोलन की आवाज
 
रिपोर्टों के मुताबिक, 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च में NEET मामले से जुड़े पीड़ित परिवारों और कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों को भी आगे रखा जाएगा। मार्च के जरिए सरकार और दिल्ली पुलिस पर लंबित मामलों में कार्रवाई का दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी।

फिर बड़ा आंदोलन बनने की तैयारी?
 
CJP का नया ऐलान ऐसे समय में आया है जब देश के अलग-अलग राज्यों में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली का यह मार्च सिर्फ पुराने आंदोलन की वापसी नहीं, बल्कि सरकार पर लंबित वादों को पूरा कराने के लिए नया दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
 
अब सबकी नजर 5 सितंबर पर रहेगी कि इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित यह मार्च कितना बड़ा रूप लेता है और सरकार CJP की FIR वापसी तथा न्याय से जुड़ी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।