भोपाल नगर निगम बैठक में हंगामा: गोमांस के मुद्दे पर आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष

प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने गोमांस और स्लॉटर हाउस का मुद्दा उठाया।

भोपाल नगर निगम बैठक में हंगामा: गोमांस के मुद्दे पर आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष
Bhopal Nagar Nigam Budget 2026
भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक सोमवार को जोरदार हंगामे के साथ शुरू हुई। प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने शहर के स्लॉटर हाउस में कथित गौकशी और गोमांस मिलने का मामला उठाया। जिसको लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पिछली बैठक में आयुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अब तक केवल असलम चमड़ा पर ही कार्रवाई हुई है। जबकि अन्य आरोपियों और संबंधित अधिकारियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

असलम चमड़ा पर NSA के तहत कार्रवाई कर जेल भेजा
विपक्ष ने मांग की कि इस मामले में शासन स्तर की कमेटी की जांच रिपोर्ट परिषद में पेश की जाए और सभी दोषियों पर समान रूप से कार्रवाई हो। इस पर परिषद अध्यक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि असलम चमड़ा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेजा जा चुका है। हालांकि, विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब एक आरोपी पर इतनी सख्त कार्रवाई की गई है, तो अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों बख्शा जा रहा है।

बैठक के दौरान महापौर मालती राय ने स्पष्ट किया कि स्लॉटर हाउस से जुड़े टेंडर और वर्क ऑर्डर प्रशासनिक कार्यकाल में जारी किए गए थे और सभी अनुमतियां तय शर्तों के अनुसार दी गई थीं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बिना पूरी जानकारी के मुद्दे को तूल दे रहा है और अनावश्यक हंगामा कर रहा है। इस दौरान सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी विपक्ष पर पिछली बैठक में चर्चा से बचने का आरोप लगाया।

MIC मेंबर रविंद्र यति ने निगम अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

सदन में MIC मेंबर रविंद्र यति ने निगम के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। रविंद्र यति ने कहा कि निगम के अधिकारी-कर्मचारी तय एजेंडा और MIC के निर्णय में छेड़छाड़ और फेरबदल करते हैं। एजेंडा में कुछ और लिखा रहता है, MIC के निर्णय में कुछ और लिखा रहता है। डॉक्यूमेंट में फेर बदल किया जा रहा है, MIC निर्णय कुछ और लेती है और डॉक्यूमेंट में प्रिंट कुछ और किया जाता है। आदमपुर खंती के एजेंडा के प्रस्ताव में MIC के निर्णय के उलट फेरबदल किया गया है। 

जनप्रतिनिधियों को चौराहे का नेता बना दिया है और बाकी निर्णय खुद ले रहे हैं। जब मामला फंस जाते हैं तो MIC और परिषद पर डाल देते हैं। अधिकारीयों- कर्मचारियों की हरकतों की वजह से ही वित्त विभाग में लोकायुक्त का छापा पड़ा है। एमआईसी मेंबर ने MIC के निर्णय में डॉक्यूमेंट से फिर बदल करने वाले कर्मचारी और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, जिस पर निगम अध्यक्ष ने आयुक्त को जांच के आदेश दिए। 

सदन में एजेंडे पर भी चर्चा हुई कि आदमपुर छावनी में कचरा निष्पादन का टेंडर दिया जाए या नहीं। ये बैठक का प्रमुख एजेंडा, जिस पर सदन में चर्चा की गई। NHAI के द्वारा कचरे को सड़क का बेस बनाने की खबर के बाद टेंडर नहीं देने पर जोर दिया गया और कहा गया कि टेंडर जारी हो या नहीं, इसका फैसला आयुक्त पर छोड़ा जाए। 

निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने इस पर जवाब दिया कि आदमपुर खंती में शहर का कचरा है। सड़क निर्माण में ऐसे कचरा प्रयोग किया जाएगा, जिसका पूर्ण रूप से नष्ट नहीं किया जा सकता। जितना भी कचरा है इसका निष्पादन होगा, उसके बाद ही टेंडर कंप्लीट माना जाएगा। टेंडर में 330 दिन का समय दिया गया है। जैसे-जैसे जमीन खाली होगी, वैसे-वैसे भुगतान किया जाएगा। 55 करोड़ की राशि से कचरा में उत्पादन का काम किया जाना है। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने जल्द से जल्द कचरा निष्पादन के लिए निर्देश दिए हैं। आदमपुर खंती हमारे शहर ने ही बनाई है तो साफ करने की भी जिम्मेदारी हम सभी की है।

कांग्रेस पार्षदों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की
गौकशी के मुद्दे पर राजनीतिक रंग भी देखने को मिला। कांग्रेस पार्षदों ने विधानसभा में उठाए गए प्रस्ताव का हवाला देते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की और इसे नगर निगम परिषद से पारित कर शासन को भेजने की बात कही। वहीं, बीजेपी पार्षदों ने भी गोमांस के मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
बैठक के दौरान माहौल उस समय और गर्म हो गया जब विपक्ष ने सत्ता पक्ष के पार्षदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें ‘चोर’ तक कह दिया। इसके जवाब में सत्ता पक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। यहां तक कि परिषद में भोजन को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच बहस छिड़ गई, जिससे बैठक का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

लिगेसी वेस्ट के प्रस्ताव पर मीटिंग में हंगामे की स्थिति

लिगेसी वेस्ट के प्रस्ताव पर मीटिंग में हंगामे की स्थिति बन गई। जब प्रस्ताव आया तो किसी ने भी इस पर सहमति नहीं जताई। इस पर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कमिश्नर से पूरे प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। करीब 7 मिनट तक कमिश्नर ने पूरा प्रस्ताव रखा। इस पर बीजेपी पार्षद नीरज सिंह ने कई सवालों पर कमिश्नर को घेर लिया।

इसी बीच एमआईसी मेंबर रविंद्र यति ने एमआईसी के एजेंडे को बदलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किस 420 नटवरलाल ने प्रस्ताव ही बदल दिया है। हमने परिषद की बैठक में प्रस्ताव लाने की बात कही थी, अनुशंसा नहीं की थी।

नगर निगम का करीब 3500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट
इन विवादों के बीच नगर निगम का करीब 3500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट भी पेश किया जाना है। हालांकि, इस बार भी बजट से ज्यादा चर्चा पिछले दो वर्षों से अधूरे पड़े विकास कार्यों पर हो रही है। शहर में प्रस्तावित सात हेरिटेज गेट और गीता भवन जैसे प्रोजेक्ट अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। जानकारी के अनुसार, केवल दो हेरिटेज गेट के लिए ही भूमिपूजन हुआ है।

इसके अलावा बैठक में 14 नई पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा, जिनमें से पांच पार्किंग मेट्रो स्टेशनों के नीचे बनाने की योजना है। इन पार्किंग में चार पहिया और दो पहिया वाहनों के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी और इसके लिए पुलिस की सहमति भी ली जा चुकी है।